जैन धर्म का पैग़ाम | Jain dharm ka paigam

जैन धर्म का पैग़ाम"

जहाँ अहिंसा का हर पल सम्मान होता है,
वहीं से जैन धर्म का नया विहान होता है।

न बैर की कोई दीवार, न नफ़रतों का धुआँ,
यहाँ तो प्रेम से हर दिल जवान होता है।

क्षमा की छाँव में खिलते हैं ज़िंदगी के सुमन,यही तो आत्मा का सच्चा उत्थान होता है।

महावीर की वाणी आज भी पुकारती है,जो स्वयं को जीत ले, वही महान् होता है।

न धन का घमंड रहे, न पद का अभिमान रहे, संयम से ही मनुष्य का सम्मान होता है।

चलो जलाएँ दिलों में दया के दीप ऐसे, कि हर दिशा में शांति का विधान होता है।

यही संदेश है जग को, यही अमर है वचन—“अहिंसा परमो धर्मः”, यही पहचान होता है।

रचनाकार: आशिका जैन (Aashika Jain), भगवां, जिला छतरपुर
Instagram: @Writesbyaashika