समय-समय पर समय¹ न जाना,
अनंत काल यूँ बीत गया।
क्रंदन तेरा बड़ा रुधिर था,
उर को सुनना भूल गया।।
खुद को साक्षी मानो प्राणी,
न समय यूँ खाली जाएगा।
भेद-ज्ञान की ज्योति जलाकर,
तू सिद्ध-अवस्था पाएगा।।
- आत्मा
रचनाकार: पर्व जैन (Parv Jain), खनियाधाना
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