जागो जागो जागो चेतन,
मोह नींद से तुम जागो।
हुआ सवेरा देखो तो तुम,
जिनगुण में रम जाओ तुम।
इच्छाओं का गड्ढा है ये,
मायावियों का अड्डा है ये।
न मोह करो, न क्षोभ करो,
साम्यभाव तुम सदा धरो।
परिणामों में नहीं पड़ो तुम,
पारिणामिक में सदा रहो तुम।
जागो जागो जागो चेतन,
इच्छाओं से भागो चेतन।
एकबार जागो तो चेतन,
ज्ञान ख़ज़ाना पाओ चेतन।
AJ
रचनाकार: रौनक जैन (Rounak Jain), खड़ैरी