हम दिगम्बर मुनिवरों के दास के भी दास हैं | Hum Digamber Munivaron ke das ke bhi das hain

भजन:- हम दिगंबर मुनिवरों के दास के भी दास हैं..
लेखक:- पंडित संजीव जैन
संगीत:- सरस्वती स्टूडियो
संगीत निर्माता:- अरुण विर
स्वर :- पंडित संजीव जैन
सहयोगी स्वर :- शिखा राणा

हम दिगम्बर मुनिवरों के दास के भी दास हैं।
धन्य उनकी परिणति जो आत्मा के पास हैं।।
जगत के परमाणु से भी नहीं जिनको आश है।।
धन्य…

मुक्त होना चाहते यदि भव दुखों से भव्यजन।
तो करो श्रामण्य अंगीकार सिद्धों को नमन।।
अहो द्रव्यलिंग सार्थक, भावलिंग यदि पास है।
धन्य उनकी परिणति जो आत्मा के पास है।।1।।

स्त्री पुत्रादि गुरू-जन आत्मा से भिन्न हैं।
व्रत समिति आचार के शुभ भाव मुझसे अन्य हैं।।
नहीं पर के ग्रहण त्यागी, यही सत उपवास है।
धन्य उनकी परिणति जो आत्मा के पास है।।2।।

अहो आगम चक्षु साधु, आत्मा को साधते ।
जीव द्रव्य मे छिपा वो जीव तत्व विचारते।।
बाह्य में वनवास पर निज ब्रह्म ही आवास है।
धन्य उन‌की परिणति जो आत्मा के पास है।।3।।

है नहीं प्रतिबद्धता, आवास में उपवास में।
और ना आहार ना विहार, विकथा वाद में।।
फैलती चहुं और बस निर्ग्रंथता की सुवास है।
धन्य उनकी परिणति जो आत्मा के पास है।।4।।