हे जिनेश्वर! धन्य हो
(तर्ज - साधना के रास्ते)
हे जिनेश्वर! धन्य हो
अबध्द स्पृष्ट अनन्य हो
नमन बारम्बार - 2
दोष अठ्ठारह तजे
आप मुक्ति को जजे
नमन बारम्बार - 2
आपके दर्शन से दिखता, मुझको मेरा रूप है
आप जिनमंदिर में हैं, मूरत तिहारी अनूप है
आपका जो स्थान है, तह मेरा सत्य स्वरूप है
स्वचतुष्टय धार
नमन बारम्बार
ब्रह्मा विष्णु महेश दाता, धन्य हो सब नाम को
असमर्थ हैं आपके, गुणचयन अरु गुणगान को
ज्ञान का भण्डार अरु, सब सेम झलकें ज्ञान को
नाथ जाननहार
नमन बारम्बार
(नमन शत् शत् बार)
Artist: Shruti Jain Shastri Shaswat