हस्तकरघा | Hastakargha

हिंसक वस्त्रों से ना करो श्री जी का प्रक्षाल,
पुण्य का क्षय और पापों का होगा प्रसार।
ब्रांडेड वस्त्रों में होती हिंसक चर्बी,
उपयोग कर न बनो तुम अधर्मी।
मन शुद्धि, वचन शुद्धि, काय शुद्धि बोल लगाते चौका,
हिंसा से उत्पन्न कपड़े पहन देते खुद से खुद को धोखा।
मंदिर जाकर करते पाप और कषायों का खातमा,
पर जीवहत्या से बने कपड़ों में छुपे जीव की दुत्कारती आत्मा।
हे प्राणी! ना भटको इस दुनिया की चकाचौंध में,
चरखा वाले बापू के सपनों को न लगना रौंदने।
बापू ने सिखाया हमें अपने कपड़ों को बुनना,
हर भारतीय को बस यही उद्देश्य है चुनना।
चलाओ चरखा और हस्तकरघा अपनाओ,
आचार्य श्री के सपना को पूरा कर दिखाओ।

रचनाकार: मीतू जैन (Meetu Jain), पुरुलिया
Instagram: @Jain.meet_u