ज्ञायक ही एक सहारा | Gyayak Hi Ek Sahara

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ज्ञायक ही एक सहारा ।
तू तो है जाननहारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

ज्ञायक ही एक सहारा ।
तू तो है जाननहारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

तुम ज्ञायक को नित लखना ।
विषयों से दूर ही रहना ॥
तू अरस अरूपी भगवन ।
भगवन बनकर ही रहना ॥
तू नित प्रति उनको ध्याना ।
बस एक ही ध्येय हमारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

ज्ञायक ही एक सहारा ।
तू तो है जाननहारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

तुम सहज हो ज्ञान स्वभावी ।
और सहज ही ज्ञाता रहना ॥
फिर सहज प्रगट हो जावे ।
रत्नत्रय का वो गहना ॥
तुम बीच चैतन्य में बसना ।
बस ज्ञायक रूप हमारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

ज्ञायक ही एक सहारा ।
तू तो है जाननहारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

तुम मुक्त स्वरूप को जानो ।
सिद्धों के संग ही रहना ॥
फिर काल अनंते सुखमय ।
तुम मुक्ति पुरी में रहना ॥
निज ज्ञायक के आश्रय से ।
ये निर्मल बहती धारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

ज्ञायक ही एक सहारा ।
तू तो है जाननहारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

ज्ञायक ही एक सहारा ।
तू तो है जाननहारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

ज्ञायक ही एक सहारा ।
तू तो है जाननहारा ॥
बस ज्ञाता द्रष्टा रहना ।
ज्ञायक ही तारणहारा ॥

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स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।