ज्ञान और वैराग्य का देखो ये अद्भुत मेल है।
कर्म जिससे नष्ट हों ये मोक्षमग का खेल है।।
निजज्ञान बिन पाता न चेतन एक क्षण सुख चैन है।
जो जानता शुद्धात्मा को वो ही सच्चा जैन है ।।
मात्र थोथे ज्ञान या वैराग्य से कुछ नहीं मिलता।
ज्ञान और वैराग्य के ही योग से शिवद्वार खुलता।।
जान लो इस ज्ञान और वैराग्य की महिमा महान।
ज्ञान अरु वैराग्य से ही बनो स्वयं सिद्ध भगवान।।
AJ
रचनाकार: मोहित जैन मंचल (Mohit Jain Manchal), बांदा, सागर
Instagram: @marvelous_mohitmanchal