गुरुदेव की मुद्रा! | Gurudev ki mudra!

यदि गुरुदेव के नाम से याद आती है,
बस ये तेज भरी मुद्रा,
तो समझो कि हम गुरुदेव को नहीं समझे!
यदि गुरुदेव बोलते ही हमें
बस सोनगढ़ याद आये,
तो समझ जाना थोड़ी कचास बाकी है!!
यदि गुरुदेव बोलते ही हमें
मोक्षमार्ग साक्षात् नज़र नहीं आता,
तो समझ जाना अभी हम गुरुदेव को नहीं समझे!
गुरुदेव बोलते ही
समयसार याद न आये,
तो समझ जाना कि अभी भी
हम गुरुदेव को नहीं समझे!
यदि गुरुदेव का नाम लेते ही
हमें वह अध्यात्म क्रांति याद न आये,
तो समझ जाना कि अभी भी
हम गुरुदेव को नहीं समझे!
गुरुदेव का नाम लेते ही
यदि छोटे दादा याद न आयें,
बाबू जी याद न आयें,
तो समझ जाना अभी हम गुरुदेव को नहीं समझे!
यदि गुरुदेव के नाम से ही
टोडरमल स्मारक याद न आये,
मुमुक्षु आश्रम याद न आये,
शास्त्री विद्यालय याद न आये,
तो समझ जाना कि अभी भी
हम गुरुदेव को नहीं समझे!
यदि गुरुदेव के नाम से हमें
सहस्त्राधिक शास्त्री विद्वान् याद न आयें,
तो समझ जाना
हमने अभी तक कानजी स्वामी को नहीं जाना!!
और ये सब एक बार को
याद न आयें, चलेगा;
किन्तु गुरुदेव की क्रांति से
हमें निजात्मा याद न आये,
तो समझ जाना
गुरुदेव को समझना अभी बाकी है।

रचनाकार: चिद्रूप जैन (Chidrup Jain), कोटा