गुरुदेव: एक अभाव कल्पना | Gurudev: ek abhav kalpana

यदि गुरुदेव न होते तो हमारा क्या होता?
सत् दर्शन का सूर्य अस्त हो गया होता!
इतना ही नहीं,
गुरुदेव न होते तो मुमुक्षु शब्द शब्द बस रह जाता
घर-घर की बजाय शास्त्रों में ही रह जाता
अमृतचंद और पूज्यपाद स्वामी के ग्रंथों में ही रह जाता

समयसार तब भी होता, मोक्षमार्ग प्रकाशक भी होता
लेकिन मंदिर के किसी कोने में रेशमी वस्त्र में ही लिपटा रहता!

टोडरमल जी लिख तो गये शास्त्राभ्यास की महिमा -
लेकिन गुरुदेव न होते तो टोडरमल जी को पढ़ने वाले न होते!

हुकमचंद भारिल्ल तब भी होते धर्मेन्द्र जी भी होते
लेकिन न वे तत्त्ववेत्ता छोटे दादा होते न ही धर्मेन्द्र जी शास्त्री होते!!
यदि गुरुदेव न होते तो कोई शास्त्री विद्वान् न होते!

गुरुदेव न होते तो बाबू जी तो होते
लेकिन केवल रवि किरणों वाली देव-शास्त्र-गुरु पूजन न होती

यदि गुरुदेव न होते तो प्रवचन सभाएं तो चलतीं -
लेकिन उनमें पाप समान पुण्य को भी हेय कौन कहते?

गुरुदेव के अभाव की कल्पना से ही काँप उठता हूँ मैं -
कि यदि गुरुदेव न होते तो मोक्षमार्ग दीपक कौन होते?

इसलिए ये आत्मकल्याण का अवसर जाने योग्य है नहीं
क्योंकि गुरुदेव से मुक्तिमार्ग प्रदर्शक हर कोई नहीं होते!!

रचनाकार: चिद्रूप.जे (Chidrup.j), कोटा
Instagram: @Chidrup.j