गुरु माँ सुन | Guru ma sun

गुरु माँ सुन, तुममें रत्नत्रय गुण,
संयम पथ पर चलने वाली, मेरी पुकार सुन, सुन, सुन।
गुरु माँ सुन।
संसारी प्राणी हम, मन भक्ति में लगता नहीं,
कैसे करें कल्याण, मन ये समझता नहीं।
दर्शन तेरा पाने को, तेरे द्वार आना है,
हमने तो किया अब, पक्का इरादा है।
त्याग की राह पर, रखूँ मैं कदम।
गुरु माँ सुन…
मन को वश में कर लें तो, बन जाए बिगड़ी भी,
जैन कुल में जन्म मिला, है ये बड़ा पुण्य ही।
व्रत-तप करूँगी, जीवन सफल करूँगी,
जिनवाणी-सार को हृदय में उतारूँगी।
छोटे-छोटे नियमों से, करूँ मैं पहल।
गुरु माँ सुन…
देवदर्शन के बिना, कोई ज़िंदगानी नहीं,
गुरु-आशीष से ही खुली, कितनों की किस्मत यहीं।
शत-शत नमन है, चरणों में वंदन है,
गुरु माँ के चरणों में, सौंपा अपना जीवन है।
दे दो आशीष मुझे, काटूँ मैं करम।
गुरु माँ सुन…

रचनाकार: दीपिका जैन (Deepika Jain), नई दिल्ली
Instagram: @anmol_lamhe