घड़ी घड़ी में देखो भाई! पलपल घड़ी पलटती है।
घड़ी घड़ी में उमर घटे, हर घड़ी जवानी ढलती है॥
यदि बीत गई यह घड़ी व्यर्थ, यह घड़ी न वापस आना है।
तुम सावधान हर घड़ी रहो, बस यही घड़ी का कहना है॥
जो घड़ी घड़ी सत्कर्म करे, हर घड़ी पाप से डरता है।
प्रभु-भजन करे जो घड़ी घड़ी, हर घड़ी सुखी वह रहता है॥
घड़ी सदा नहिं रहती अच्छी, जब यह घड़ी बिगड़ती है।
उसी घड़ी से घड़ी घड़ी पर, विपदा सहनी पड़ती है॥
बिगड़ी थी जब घड़ी राम की, उसी घड़ी वनवास हुआ।
घड़ी टली नहिं, उसी घड़ी में, कैसा हाहाकार हुआ॥
घड़ी घड़ी का फेर देखलो, सबसे बड़ी घड़ी भाई।
कोई घड़ी बजती शहनाई, कोई घड़ी रोवा गाई॥
हर घड़ी बदलती रहे घड़ी, यह घड़ी कभी नहिं रुक सकती।
जब घड़ी मौत की आजाये, वह घड़ी कभी नहिं टल सकती॥
प्रेमचन्द ! रख ध्यान घड़ी का, घड़ी आखरी आना है।
वह घड़ी, घड़ी भर नहीं रुके, जिस घड़ी यहाँ से जाना है॥
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