परमात्मा पाऊँ
निज में रम जाऊँ…
मेरे हृदय में ख्वाब हैं
एक नाव है, एक नाव है
तत्त्वज्ञान की एक नाव है
भगवान् के दर्शन तो पावन हैं।
प्रतिमा का रूप मन भावन है।।
आत्म से परमात्मा सिर्फ बनने
का मेरे हृदय में ख्वाब हैं
एक नाव है…
उपसर्ग परिषह गुरुवर सहते।
तप संयम में लीन ही रहते।।
अब मैं भी ऐसी सहजता को
पाऊँ मेरे मन में भाव है
एक नाव है…
जिनवाणी सर्वज्ञों से आई चलती
सारभूत वीतरागता इसमें पलती
ऐसे हित उपदेश को मैं भी अपनाऊँ,
मेरे मन में भाव हैं
एक नाव है…
एक नाव है
संसार महा तम से बचाए,
उन भव्यों के लिए एक छाँव है
मोक्ष में शीघ्र सजने का सच्चा ये
सुख को पाने का एक उपाय है
एक नाव है…
तत्त्वज्ञान की एक नाव है
रचनाकार: अयान जैन (Ayan Jain), कटनी
YouTube: https://www.youtube.com/watch?v=o5JLAXtA0M4&list=PLXcBKWNnm5zU&index=30