धर्म के नाम पर व्यापार | Dharm ke nam par vyapar

धर्म-धर्म को करने वाले धर्म-धर्म को बेच रहे।
धर्म के नाम पर पैसा लेकर घर पर रोटी-पूरी जो सेंक रहे॥
मैं कहना चाहता हूँ उन लोगों को, क्यों इसको व्यापार बना रहे हो?
रोटी-गाड़ी-बंगला लेने में अपने संसार को बढ़ा रहे हो॥
अरे भाई! छोड़ो इन गाड़ी-बंगला को, न ही इसको पाना है।
धर्म के द्वारा धर्म को पाकर मुक्ति-पुरी को जाना है॥

रचनाकार: अमन जैन (Aman Jain), खड़ेरी
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