चौबीसों तीर्थंकरों की एक एक जानकारी, सारणी रूप में: जन्म नगरी, माता पिता, नक्षत्र, वंश, चिह्न, शरीर का वर्ण, ऊँचाई (अवगाहना), आयु, वैराग्य वृक्ष, निर्वाण स्थल और पूर्वभव। हर बात दिगम्बर आचार्यों के ग्रंथों से मिलाई गई है, ग्रंथ और श्लोक संख्या नीचे दी है।
सामान्य परिचय (तीर्थंकर कौन होते हैं, सोलह कारण भावना, पंच कल्याणक, ४६ मूलगुण, समवसरण) के लिए देखें: तीर्थंकर: सम्पूर्ण विस्तृत जानकारी
१. जन्म: नगरी, माता पिता, नक्षत्र, वंश
| क्रम | तीर्थंकर | जन्म नगरी | पिता | माता | जन्म नक्षत्र | वंश |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ऋषभनाथ (आदिनाथ) | विनीता (अयोध्या) | नाभिराज | मरुदेवी | उत्तराषाढ़ा | इक्ष्वाकु |
| 2 | अजितनाथ | साकेता (अयोध्या) | जितशत्रु | विजया | रोहिणी | इक्ष्वाकु |
| 3 | सम्भवनाथ | श्रावस्ती | जितारि | सेना | पूर्वाषाढ़ा * | इक्ष्वाकु |
| 4 | अभिनन्दननाथ | अयोध्या | संवर | सिद्धार्था | पुनर्वसु | इक्ष्वाकु |
| 5 | सुमतिनाथ | साकेता (अयोध्या) | मेघप्रभ | सुमंगला | मघा | इक्ष्वाकु |
| 6 | पद्मप्रभ | वत्सनगरी (कौशाम्बी) | धरण | सुसीमा | चित्रा | इक्ष्वाकु |
| 7 | सुपार्श्वनाथ | काशी (वाराणसी) | सुप्रतिष्ठ | पृथ्वी | विशाखा | इक्ष्वाकु |
| 8 | चन्द्रप्रभ | चन्द्रपुरी | महासेन | लक्ष्मणा | अनुराधा | इक्ष्वाकु |
| 9 | पुष्पदन्त (सुविधिनाथ) | काकन्दी | सुग्रीव | रामा | मूल | इक्ष्वाकु |
| 10 | शीतलनाथ | भद्रिकापुरी | दृढ़रथ | सुनन्दा | पूर्वाषाढ़ा | इक्ष्वाकु |
| 11 | श्रेयांसनाथ | सिंहपुरी | विष्णु | विष्णुश्री | श्रवण | इक्ष्वाकु |
| 12 | वासुपूज्य | चम्पापुरी | वसुपूज्य | जया | शतभिषा | इक्ष्वाकु |
| 13 | विमलनाथ | काम्पिल्य | कृतवर्मा | शर्मा | उत्तराभाद्रपद | इक्ष्वाकु |
| 14 | अनन्तनाथ | विनीता (अयोध्या) | सिंहसेन | सर्वयशा | रेवती | इक्ष्वाकु |
| 15 | धर्मनाथ | रत्नपुरी | भानु | सुव्रता | पुष्य | इक्ष्वाकु |
| 16 | शान्तिनाथ | हस्तिनागपुर | विश्वसेन | ऐरा | भरणी | कुरुवंश |
| 17 | कुन्थुनाथ | हस्तिनागपुर | सूर्य | श्रीदेवी | कृत्तिका | कुरुवंश |
| 18 | अरनाथ | हस्तिनागपुर | सुदर्शन | मित्रा | रोहिणी | कुरुवंश |
| 19 | मल्लिनाथ | मिथिला | कुम्भ | रक्षिता | अश्विनी | इक्ष्वाकु |
| 20 | मुनिसुव्रतनाथ | कुशाग्रनगर (राजगृह) | सुमित्र | पद्मावती | श्रवण | हरिवंश |
| 21 | नमिनाथ | मिथिला | विजय | वप्रा | अश्विनी | इक्ष्वाकु |
| 22 | नेमिनाथ | शौरीपुर | समुद्रविजय | शिवा | चित्रा | हरिवंश |
| 23 | पार्श्वनाथ | वाराणसी | अश्वसेन | वर्मा (वामा) | विशाखा | उग्रवंश |
| 24 | महावीर (वर्धमान) | कुण्डपुर | सिद्धार्थ | प्रियकारिणी (त्रिशला) | उत्तराफाल्गुनी | नाथवंश |
* सम्भवनाथ के नक्षत्र के लिए मूल श्लोक में “ऐन्द्रम् ऋक्षम्” पाठ है, हिन्दी अर्थ में पूर्वाषाढ़ा लिखा है।
२. शरीर: चिह्न, वर्ण, ऊँचाई, आयु
| क्रम | तीर्थंकर | चिह्न | शरीर का वर्ण | ऊँचाई (अवगाहना) | आयु |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ऋषभनाथ (आदिनाथ) | बैल | तपाये स्वर्ण जैसा | ५०० धनुष | ८४ लाख पूर्व |
| 2 | अजितनाथ | हाथी | तपाये स्वर्ण जैसा | ४५० धनुष | ७२ लाख पूर्व |
| 3 | सम्भवनाथ | घोड़ा | तपाये स्वर्ण जैसा | ४०० धनुष | ६० लाख पूर्व |
| 4 | अभिनन्दननाथ | बन्दर | तपाये स्वर्ण जैसा | ३५० धनुष | ५० लाख पूर्व |
| 5 | सुमतिनाथ | चकवा | तपाये स्वर्ण जैसा | ३०० धनुष | ४० लाख पूर्व |
| 6 | पद्मप्रभ | लाल कमल | लाल (कमल के गर्भ जैसा) | २५० धनुष | ३० लाख पूर्व |
| 7 | सुपार्श्वनाथ | स्वस्तिक | हरित (प्रियंगु पुष्प जैसा) | २०० धनुष | २० लाख पूर्व |
| 8 | चन्द्रप्रभ | अर्धचन्द्र | श्वेत (चन्द्रमा जैसा) | १५० धनुष | १० लाख पूर्व |
| 9 | पुष्पदन्त (सुविधिनाथ) | मगर | श्वेत (चन्द्रमा जैसा) | १०० धनुष | २ लाख पूर्व |
| 10 | शीतलनाथ | कल्पवृक्ष | तपाये स्वर्ण जैसा | ९० धनुष | १ लाख पूर्व |
| 11 | श्रेयांसनाथ | गैंडा | तपाये स्वर्ण जैसा | ८० धनुष | ८४ लाख वर्ष |
| 12 | वासुपूज्य | भैंसा | लाल (पलाश पुष्प जैसा) | ७० धनुष | ७२ लाख वर्ष |
| 13 | विमलनाथ | सूअर | तपाये स्वर्ण जैसा | ६० धनुष | ६० लाख वर्ष |
| 14 | अनन्तनाथ | सेही | तपाये स्वर्ण जैसा | ५० धनुष | ३० लाख वर्ष |
| 15 | धर्मनाथ | वज्रदण्ड | तपाये स्वर्ण जैसा | ४५ धनुष | १० लाख वर्ष |
| 16 | शान्तिनाथ | हिरण | तपाये स्वर्ण जैसा | ४० धनुष | १ लाख वर्ष |
| 17 | कुन्थुनाथ | बकरा | तपाये स्वर्ण जैसा | ३५ धनुष | ९५ हजार वर्ष |
| 18 | अरनाथ | मछली | तपाये स्वर्ण जैसा | ३० धनुष | ८४ हजार वर्ष |
| 19 | मल्लिनाथ | कलश | तपाये स्वर्ण जैसा | २५ धनुष | ५५ हजार वर्ष |
| 20 | मुनिसुव्रतनाथ | कछुआ | श्याम (अंजनगिरि जैसा) | २० धनुष | ३० हजार वर्ष |
| 21 | नमिनाथ | नीलकमल | तपाये स्वर्ण जैसा | १५ धनुष | १० हजार वर्ष |
| 22 | नेमिनाथ | शंख | नील श्याम (मोर के कण्ठ जैसा) | १० धनुष | १ हजार वर्ष |
| 23 | पार्श्वनाथ | सर्प | हरित (कच्चे धान जैसा) | ९ हाथ | १०० वर्ष |
| 24 | महावीर (वर्धमान) | सिंह | तपाये स्वर्ण जैसा | ७ हाथ | ७२ वर्ष |
ऊँचाई का क्रम: ऋषभदेव ५०० धनुष, फिर पुष्पदन्त तक हर एक की ५० धनुष कम, शीतलनाथ ९० धनुष, फिर अनन्तनाथ तक १० धनुष कम (अनन्तनाथ ५० धनुष), फिर धर्मनाथ ४५ धनुष से नेमिनाथ तक ५ धनुष कम (नेमिनाथ १० धनुष), पार्श्वनाथ ९ हाथ और महावीर ७ हाथ।
वर्ण का सार: चन्द्रप्रभ और पुष्पदन्त श्वेत, पद्मप्रभ और वासुपूज्य लाल, सुपार्श्व और पार्श्व हरित, मुनिसुव्रत और नेमिनाथ श्याम, शेष सोलह तीर्थंकर स्वर्ण वर्ण के।
३. दीक्षा और निर्वाण
| क्रम | तीर्थंकर | वैराग्य (दीक्षा) वृक्ष | गृहस्थ अवस्था | निर्वाण स्थल |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ऋषभनाथ (आदिनाथ) | वट | राजा होकर दीक्षा | कैलास |
| 2 | अजितनाथ | सप्तपर्ण | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 3 | सम्भवनाथ | शाल | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 4 | अभिनन्दननाथ | सरल (देवदारु) | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 5 | सुमतिनाथ | प्रियंगु | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 6 | पद्मप्रभ | प्रियंगु | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 7 | सुपार्श्वनाथ | शिरीष | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 8 | चन्द्रप्रभ | नाग | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 9 | पुष्पदन्त (सुविधिनाथ) | साल | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 10 | शीतलनाथ | प्लक्ष | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 11 | श्रेयांसनाथ | तेंदू | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 12 | वासुपूज्य | पाटला | कुमार अवस्था में दीक्षा | चम्पापुरी |
| 13 | विमलनाथ | जम्बू | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 14 | अनन्तनाथ | पीपल | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 15 | धर्मनाथ | दधिपर्ण | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 16 | शान्तिनाथ | नन्द | चक्रवर्ती होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 17 | कुन्थुनाथ | तिलक | चक्रवर्ती होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 18 | अरनाथ | आम्र | चक्रवर्ती होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 19 | मल्लिनाथ | अशोक | कुमार अवस्था में दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 20 | मुनिसुव्रतनाथ | चम्पक | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 21 | नमिनाथ | वकुल | राजा होकर दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 22 | नेमिनाथ | मेषशृंग | कुमार अवस्था में दीक्षा | ऊर्जयन्त (गिरनार) |
| 23 | पार्श्वनाथ | धव | कुमार अवस्था में दीक्षा | सम्मेदशिखर |
| 24 | महावीर (वर्धमान) | साल | कुमार अवस्था में दीक्षा | पावापुर |
शान्तिनाथ, कुन्थुनाथ और अरनाथ तीनों चक्रवर्ती भी थे और तीर्थंकर भी। वासुपूज्य, मल्लिनाथ, नेमिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर ने कुमार अवस्था में ही घर छोड़ा। बीस तीर्थंकरों का निर्वाण सम्मेदशिखर से हुआ।
४. पूर्वभव: पिछले जन्म का नाम और किस स्वर्ग से आये
| क्रम | तीर्थंकर | पूर्वभव का नाम | किस स्वर्ग से आये |
|---|---|---|---|
| 1 | ऋषभनाथ (आदिनाथ) | वज्रनाभि | सर्वार्थसिद्धि |
| 2 | अजितनाथ | विमलवाहन | वैजयन्त |
| 3 | सम्भवनाथ | विपुलख्याति | ग्रैवेयक |
| 4 | अभिनन्दननाथ | विपुलवाहन | वैजयन्त |
| 5 | सुमतिनाथ | महाबल | वैजयन्त |
| 6 | पद्मप्रभ | अतिबल | ऊर्ध्व ग्रैवेयक |
| 7 | सुपार्श्वनाथ | अपराजित | मध्यम ग्रैवेयक |
| 8 | चन्द्रप्रभ | नन्दिषेण | वैजयन्त |
| 9 | पुष्पदन्त (सुविधिनाथ) | पद्म | अपराजित |
| 10 | शीतलनाथ | महापद्म | आरण |
| 11 | श्रेयांसनाथ | पद्मोत्तर | पुष्पोत्तर |
| 12 | वासुपूज्य | पंकजगुल्म | कापिष्ठ |
| 13 | विमलनाथ | नलिनगुल्म | महाशुक्र |
| 14 | अनन्तनाथ | पद्मासन | सहस्रार |
| 15 | धर्मनाथ | पद्मरथ | पुष्पोत्तर |
| 16 | शान्तिनाथ | दृढ़रथ | पुष्पोत्तर |
| 17 | कुन्थुनाथ | महामेघरथ | पुष्पोत्तर |
| 18 | अरनाथ | सिंहरथ | सर्वार्थसिद्धि |
| 19 | मल्लिनाथ | वैश्रवण | विजय |
| 20 | मुनिसुव्रतनाथ | श्रीधर्म | अपराजित |
| 21 | नमिनाथ | सुरश्रेष्ठ | प्राणत |
| 22 | नेमिनाथ | सिद्धार्थ | आनत |
| 23 | पार्श्वनाथ | आनन्द | वैजयन्त |
| 24 | महावीर (वर्धमान) | सुनन्द | पुष्पोत्तर |
ग्रंथों के उद्धरण
पद्मपुराण (आचार्य रविषेण), पर्व २०, श्लोक ११२:
पहले ऋषभदेव भगवान्के शरीरकी ऊँचाई पाँच सौ धनुष कही गयी है।
पद्मपुराण, पर्व २०, श्लोक ३७:
विनीता नगरी नाभिर्मरुदेव्युत्तरा तथा । आषाढा वटवृक्षश्च कैलाशः प्रथमो जिनः ॥
पद्मपुराण, पर्व २०, श्लोक ६१:
चम्पैव वासुपूज्यस्य मोक्षस्थानमुदाहृतम् । पूर्वमुक्तं त्रयाणां तु शेषाः संमेदनिर्वृताः ॥
सिद्धान्तसार दीपक (आचार्य सकलकीर्ति), अधिकार ९, श्लोक १३४ और १३५:
चन्द्राभपुष्पदन्तौ द्वौ चन्द्रकान्तमणिप्रभौ। पद्माभवासुपूज्यौ च पद्मरागमणिच्छवी ॥
सुपार्श्वपार्श्वतीर्थेशौ स्फुरन्मरकतद्युती। नेमीशसुव्रतौ श्यामौ शेषास्ते कनकप्रभाः ॥
सिद्धान्तसार दीपक, अधिकार ९, श्लोक १३६ और १३७:
मुनिसुव्रतनेमीशौ हरिवंशशिरोमणी। शान्तिकुन्थ्वरतीर्थेशा कुरुवंशविभूषणाः ॥
उग्रवंशाग्रणीः पार्श्वो वीरो नाथान्वयोद्भवः। इक्ष्वाकुकुलसञ्जाता जिनाः सप्तदशापरे ॥
सिद्धान्तसार दीपक, अधिकार ९, श्लोक १३८ और १३९ (ऊँचाई):
चापपञ्चशतान्याद्ये चोनं पञ्चाशदष्टसु। दश पञ्चसु चापानि हीनानि पञ्च चाष्टसु ॥
नव सप्तकराः प्रोक्ताः क्रमेण पार्श्ववीरयोः। उत्सेधास्तीर्थकर्तॄणां दिव्याङ्गेषु भवन्त्यमी ॥
स्रोत:
- पद्मपुराण (आचार्य रविषेण), पर्व २० (तीर्थंकरभवानुकीर्तन), श्लोक ८ से १२२: फोरम पर
- सिद्धान्तसार दीपक (आचार्य सकलकीर्ति), अधिकार ९, श्लोक १३० से १४४: फोरम पर
- चिह्न: तीर्थंकर: सम्पूर्ण विस्तृत जानकारी
The 24 Tirthankars of the present Avasarpini, one by one: birth city, parents, nakshatra, lineage, symbol, body colour, height, lifespan, renunciation tree, place of nirvana and previous birth, from Digambar texts (Padmapuran parva 20, Siddhantsar Deepak adhikar 9).