क्रोध मान माया लोभ
जग में चार कषाएँ
दिन हो या हो रात ये हमको
जग में सदा सताएँ ।।
क्रोध में गुस्सा आए
मान में आए घमंड
माया में छल ये करता है
लोभ में वस्तु चाहे
क्रोध मान… ।। 1 ।।
ये कषाएँ हैं बड़ी निराली
इन्हें कभी ना करना
जो जिनेन्द्र ने मार्ग बताया
उस पर सदा ही चलना
क्रोध मान… ।। 2 ।।
जो ना माने बात प्रभु की
दुख ही दुख वो पाए
जो जाने निज आतम प्रभु को
सच्चा सुख वो पाए
क्रोध मान… ।। 3 ।।