दिगंबर संत निराली शान,
करें किन शब्दों में गुणगान।
हमारे कुंदकुंद मुनिराज,
जेई तो जिनशासन के ताज।
विलक्षण प्रतिभा के धारी,
शांतिदूत, वीतराग-मूर्ति,
जन-जन के हितकारी।
हमें प्राणों से प्यारे हैं…
कलिकाल सर्वज्ञ खों,
शत-शत नमन हमारे हैं।
बात मोरी सुन लईयो,
तनक सी गुन लईयो,
हृदय में धर लईयो।
पंच परमागम रचे अनमोल,
देत जो अंतर के पट खोल,
अमरता के उद्घोषक हैं…
सत्य, अहिंसा, अनेकांत, वीतरागता-पोषक हैं।
हमें भगवान् बता रहे हैं…
ज्ञानामृत-रसपान करा, भ्रमरोग मिटा रहे हैं।
बात मोरी…
गुरु कहान भये एक महान्,
करत नित जिनवाणी बहुमान।
दिगंबर पंथ ही भाया है…
समयसार उर धारण कर,
सौभाग्य जगाया है।
निज पहचान कराये हैं…
भव्य जीवन खों, भेदज्ञान की कला सिखा रहे हैं।
बात मोरी…
अभिनंदन-अभिनंदन, आत्मदेव तुम्हारे हैं…
धन्य भाग जो आज आप खों, हम पहिचाने हैं।
गुरुवर की बलिहारी है…
निपुण, जोड़ कर है करती, वंदना तुम्हारी है।
बात मोरी…
रचनाकार: निपुण जैन, बैतूल
YouTube: https://www.youtube.com/watch?v=XsLUF5ursiU&list=PLXcBKWNnm5zU&index=36