भवसागर तजो खेवैया | Bhavsagar Tajo Khevaiya

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भव सागर का जो है खिवैया, खिवैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥
सुख चैन की बंसी बजैया, बजैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥

रूप रस गंध शब्द वर्ण नहीं जिसमें ।
रूप रस गंध शब्द वर्ण नहीं जिसमें ।
रूप रस गंध शब्द वर्ण नहीं जिसमें जो है अरस अरूपी सदैया, सदैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥
भव सागर का जो है खिवैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥

राग नहीं जिसमें दुख क्लेश नहीं जिसमें ।
राग नहीं जिसमें दुख क्लेश नहीं जिसमें ।
राग नहीं जिसमें दुख क्लेश नहीं जिसमें जो है वीतरागी आनंद झरैया, झरैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥
भव सागर का जो है खिवैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥

एक अखंड प्रत्यक्ष अभेद है ।
एक अखंड प्रत्यक्ष अभेद है ।
एक अखंड प्रत्यक्ष अभेद ऐसा अमृत का मैं हूँ भरैया, भरैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥
भव सागर का जो है खिवैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥

आप बनाए खुद आप ही खाए ।
आप बनाए खुद आप ही खाए ।
आप बनाए खुद आप ही खाए अपना खुरपा है अपनी कढ़ैया, कढ़ैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥
भव सागर का जो है खिवैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥

ज्ञायक से जान पहचान हुई हमको ।
ज्ञायक से जान पहचान हुई हमको ।
ज्ञायक से जान पहचान हुई हमको शुद्ध आतम के पड़ जाऊँ पैयां, पैयां ।
ऐसा है आतम भैया ॥
भव सागर का जो है खिवैया, खिवैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥
सुख चैन की बंसी बजैया, बजैया ।
ऐसा है आतम भैया ॥

सुनें:

स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।