वीर के वंशज हैं हम
हमको जैनी ही कहलाना है
पंथों में ना बंटना
हमको जैनी ही कहलाना है
यदि बंट गए पंथों में
तो कुछ भी नहीं बच पाएगा
जो गौरव जो व्यापकता है
सभी नष्ट हो जाएगा
भेद मिटाओ साथ आने का
वक्त आ गया है यारो
अपना जीवन अपने जैन
धर्म की रक्षा पर वारो
श्रद्धा भाव हो सच्चे मन से
आडंबर ना करना है
जैन कहो खुद को,
श्वेतांबर दिगंबर ना करना है
जिनशासन का परचम लहरा
वीर प्रभु को नमन करो
जैन धर्म मिला पुण्यों से
जिम्मेदारी को वहन करो
जपूं महावीर नाम तुम्हारा
तुम मेरे पालनकर्ता
मेरा क्या है इस दुनिया में
तुम ही हो कर्ताधर्ता
कुरीति, कुनीति से बचने
की शक्ति देना तुम बाबा
सबको साथ लिए चलने
की शक्ति देना तुम बाबा
महावीर तुम्हारे चरणों में
मैं अपना शीश झुकाता हूँ
भटका हूँ कहीं राह मगर
अंतिम दर तेरा आता हूँ
रचनाकार: ईश जैन शाह, बांसवाड़ा
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