बारह खड़ी कक्का काम से मुँह मत मोड़ो | Barah Khadi Kakka Kam se muh mat modo

धार्मिक बारह खड़ी –

क - कक्का काम से मुँह मत मोड़ो
ख - ख से खाना विदेशी/ बाज़ार का छोड़ो
ग - ग से गाली कभी मत देना
घ - घ से घर की बात ना कहना

च - च से चोरी कभी ना करना
छ - छ से छान के पानी पीना
ज - ज से जुआँ कभी मत खेलो
झ - झ से झूठ कभी मत बोलो

ट - ट से टहल गुरु की करना (टहल-सम्मान)
ठ - ठ से ठग से कभी ना ठगना
ड - ड से डगर प्रभु की चलना
ढ - ढ से ढोंग कभी ना करना

ण - ण से णमोकार तुम जपना
त - त से तांक-झांक कभी न करना
थ - थ से थोड़ा भी पाप न करना
द - द से दान हमेशा करना

ध - ध से धन ज्यादा नहीं रखना
न - न से नम्र बनें हम सारे
प - प से प्रेम करें हम सारे
फ - फ से फल इच्छा नहीं करना

ब - ब से बड़ों का आदर करना
भ - भ से भाई से कभी न लड़ना
म - म से माता-पिता को नमना
य - य से याद करो जिनवाणी

र - र से रहम करों जीवों पर
ल - ल से लख अब निज को जीवन को
( ल से लख अब निज को चेतन )
व - व से व्यसन छोड़ दु:खदायी
स - स से सेवा गुरु की करना
श - श से शील की रक्षा करना
ष - ष से षट् आवश्यक धरना

ह - ह से हठ तुम कभी ना करना
क्ष - क्ष से क्षय कर्मों का करना
ज्ञ - ज्ञ से ज्ञायक तुम अब बनना
( ज्ञ से ज्ञानरूप तुम बनना)

बात ये मेरी मन में धरना
अच्छे- बच्चे तुम कहलाना
कक्का काम से मुँह मत मोड़ो