बढ़े चलो बढ़े चलो | bade chalo bade chalo

poem
#1

बढ़े चलो बढ़े चलो बढ़े चलो बढ़े चलो
मोक्षमार्ग में सदा चले चलो चले चलो ||

सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो |
सत्य धर्म साथ हो तो क्यों किसी से हार हो
कर्म के शत्रुओं को दले चलो दले चलो
मोक्षमार्ग में सदा चले चलो चले चलो ||

नन्हे मुन्ने वीर हम धर्म को बढ़ायेंगे
ये धर्म है वीर का हम वीर बन जायेंगे
वस्तु तत्व जानकर चले चलो चले चलो |
मोक्षमार्ग में सदा चले चलो चले चलो ||

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