प्रूफरीडिंग बाकी है
ये बोल रिकॉर्डिंग से मशीन द्वारा लिखे गए हैं, इनमें अशुद्धियाँ हो सकती हैं।
पल पल जीवन जलता जाता है ।
बीता कल नहीं वापस आता है ।
देव शास्त्र गुरु शरण मिली तुझको ।
जिनवाणी की राह मिली तुझको ।
अब भी जो चूका गर नर भव जो चूका गर ।
भव भव में पछताएगा ।
क्यूँकि पल पल जीवन जलता जाता है ।
बीता कल नहीं वापस आता है ।
पल पल जीवन जलता जाता है ।
बीता कल नहीं वापस आता है ।
देव शास्त्र गुरु शरण मिली तुझको ।
जिनवाणी की राह मिली तुझको ।
देव शास्त्र गुरु शरण मिली तुझको ।
जिनवाणी की राह मिली तुझको ।
मंदिर में पूजा जहाँ हो ।
देवों का आदर वहाँ हो ।
शास्त्रों का चिंतन हो प्रतिपल ।
साधु समागम हो हर क्षण ।
निर्ग्रन्थ होना है अरहंत बनना है ।
सिद्धालय जाना है मुक्ति को पाना है ।
हमें तो जाना है निज घर में जाना है ।
हमें तो जाना है ।
आपको मालूम है जैनी बच्चे कैसे होते हैं ।
अरे नहीं मालूम ।
जिन मंदिर जाने वाला ।
रात्रि भोजन नहीं करने वाला ।
पानी छान के पीने वाला ।
आप ऐसे नहीं समझोगे ।
आइए ।
बच्चे मन के अच्छे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
हमको किसी से राग नहीं ।
और किसी से द्वेष नहीं ।
जिनवाणी की बात सुनें ।
नहीं किसी पर क्रोध करें ।
जिनवाणी की बात सुनें ।
नहीं किसी पर क्रोध करें ।
पाठशाला हम आते हैं ।
सच्ची बातें सुनते हैं ।
जैन धर्म की प्यारी बातें करते हैं हम सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चe मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन मंदिर नित आते हैं ।
जिनवर दर्शन करते हैं ।
रात्रि भोजन करते नहीं ।
पानी छान के पीते हैं ।
रात्रि भोजन करते नहीं ।
पानी छान के पीते हैं ।
अभक्ष्य कभी नहीं खाते हैं ।
सत्य सदा ही कहते हैं ।
मुक्ति पद के प्रत्याशी से लगते हैं हम सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
सप्त व्यसन ना करते हैं ।
पाप से दूर ही रहते हैं ।
पूजन भक्ति करते हैं ।
शांत भाव से रहते हैं ।
पूजन भक्ति करते हैं ।
शांत भाव से रहते हैं ।
बड़ों का आदर करते हैं ।
जय जिनेंद्र ही कहते हैं ।
माता पिता और जैन धर्म के हम ही हैं रखवारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
जिन शासन सेवनहारे ।
हम तो ज्ञायक बच्चे हैं भगवान् बनेंगे सारे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
बच्चे मन के अच्छे ।
सुनें:
स्रोत: Jain Kids Songs (Telegram चैनल)।