अरहन्त सिद्ध, साधु जैनधर्म
[ तर्ज- सर्वज्ञ के वचन सदा जयवन्त ]
अरहन्त सिद्ध साधु जैनधर्म मिला है।..
शत बार नमन है इन्हें, सौभाग्य खिला है।।
उत्तम है यही शरण यही मङ्गलमय है।
इस काल में चार ही महासुखमय है।।
हम तो महारोगी हैं संसार असारा।
ये मोह महा विष है हमें जग में रुलाता ।।
तुम ही हो महाऔषधि ये मोह गलाने ।
तुम एक सहारा हो हमें मोक्ष बताने ।
अरहन्त सिद्ध साधु …
Artist: Shashwat Shruti Jain Shastri