अपनी आत्मा | Apni atma

जैसे आत्मा ही आत्म-दर्शन का कारण है।
इसलिए ही आत्मा, आत्मा का गुरु कहाये।
आत्मा को ध्याओ चेतन यही , हो जाओ आत्मलीन।
बनने को प्रभु ,बस यही सच्चा मार्ग है ।
देह को जाओ भूल, बाकी सब कर दो गौण
ध्याओ मात्र आत्मा, यही तत्त्व मार्ग है।

रचनाकार: हर्ष जैन (Harsh Jain), बरायठा, सागर
Instagram: @v.harshJain
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