अहिंसा की शुरुआत थाली से ! | Ahinsa ki shuruat thali se!

सूर्य अस्त भोजन का त्याग,
यही अहिंसा का है भाव।
रात्रि में सूक्ष्म जीव बसे,
उनकी रक्षा महावीर कहे।

संयम से बने जीवन महान्,
यह ही है जिनशासन की शान ।
रात्रि से जब भोजन हटे,
मुक्तिपुरी की तब राह सजे ।

रचनाकार: अक्षय जैन (Akshay Jain), कटंगी
Instagram: @akshay_Jain_1