सूर्य अस्त भोजन का त्याग,
यही अहिंसा का है भाव।
रात्रि में सूक्ष्म जीव बसे,
उनकी रक्षा महावीर कहे।
संयम से बने जीवन महान्,
यह ही है जिनशासन की शान ।
रात्रि से जब भोजन हटे,
मुक्तिपुरी की तब राह सजे ।
रचनाकार: अक्षय जैन (Akshay Jain), कटंगी
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