मन में जब करुणा जागे, तब जीवन धनवान बने l
अहिंसा का दीप जले तो, हर प्राणी भगवान् बने ll
न क्रोध जले, न द्वेष पले, न कटु वचन की धार चले l
मधुर भाव से जो जीता, उसके संग संसार चले ll
चरण शरण है आपका, तारण-तरण जहाज चले l
भवोदधि के तट तक प्रभु, करुणा की पतवार चले ll
भवसागर की लहरों में, आपका ही आधार मिले l
हे करुणाकर प्रभु मेरे, जीवन का उद्धार चले ll
भाव भक्ति से शीश झुकाया, अंतर में उजियारा हो I
जिनवर के चरणों में रहकर, भवसागर से पारा हो ll
महावीर के सिद्धांत, जन-जन तक पहुंचे ll
अहिंसा का दीप जलाकर, सुंदर यह विश्व बने l
तत्त्वज्ञान की अमृत धारा, जीवन में उजियारा करे l
अहिंसा, संयम, क्षमा, करुणा मानव को जिन सार करे ll
रचनाकार: हर्षिता जैन (Harshita Jain), कुंवरपुर
Instagram: @harshitaJain091