अध्यात्मनवनीत
लेखक एवं पद्यानुवादक: डॉ. हुकमचन्द भारिल्ल (शास्त्री, न्यायतीर्थ, साहित्यरत्न, एम.ए., पीएच.डी.)
प्रकाशक: पण्डित टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, ए-4, बापूनगर, जयपुर
संस्करण: प्रथम संस्करण, 5 हजार प्रत (7 फरवरी 2005); भूमिका 26 जनवरी 2005
पृष्ठ: लगभग 216 (पीडीएफ के एक पन्ने पर दो पृष्ठ)
परिचय (सार)
यह डॉ. भारिल्ल के हिन्दी पद्यानुवादों और पाठ-योग्य रचनाओं का संकलन है, जिसे रोज़ के पाठ के लिए तैयार किया गया है। मूल गाथाएँ इसमें नहीं हैं, केवल उनका हिन्दी पद्य है।
उद्देश्य (भूमिका के अनुसार): स्वाध्याय तप के पाँच भेदों (वाचना, पृच्छना, अनुप्रेक्षा, आम्नाय, धर्मोपदेश) में आम्नाय अर्थात् पाठ करना है। पाठ उन ग्रन्थों का होना चाहिए जिनका आत्मकल्याण से सीधा संबंध हो, और पाठ करते समय उनका भाव स्पष्ट ख्याल में आना चाहिए। इसी दृष्टि से आचार्य कुन्दकुन्द के समयसार, प्रवचनसार और अष्टपाहुड तथा उनकी टीकाओं के कलशों का सरल पद्यानुवाद किया गया, और उनके महत्त्वपूर्ण अंश कुन्दकुन्दशतक और शुद्धात्मशतक के रूप में संकलित किए गए। समय हो तो पूरे ग्रन्थ का पाठ करें, समय कम हो तो शतकों का।
साथ में: योगसार और द्रव्यसंग्रह के पद्यानुवाद, जिनेन्द्र वन्दना, बारह भावना, तथा भक्ति के लिए चार पूजनें (देव-शास्त्र-गुरु, सिद्ध, महावीर, सीमन्धर)।
किसके लिए उपयोगी: नित्य पाठ और स्वाध्याय करने वाले साधर्मी, जो कुन्दकुन्द-साहित्य का भाव सरल हिन्दी छन्द (हरिगीत आदि) में कण्ठस्थ करना चाहते हैं। भूमिका का सूत्र: “कंठ की विद्या, अंट का दाम, समय पड़े पर आवे काम।”
विषयसूची
| क्र. | रचना | पृष्ठ | फोरम पर |
|---|---|---|---|
| 1 | मंगलाचरण : मैं ज्ञानानन्दस्वभावी हूँ | 1 | मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूँ | Main Gyananand Svabhaavi Hun |
| 2 | महावीर वन्दना | 2 | महावीर वंदना | Mahavira Vandana |
| 3 | जिनेन्द्र वन्दना | 3 | जिनेन्द्र-वन्दना | Jinendra-Vandana |
| 4 | श्री देव-शास्त्र-गुरु पूजन | 5 | श्री देव-शास्त्र-गुरु पूजन-3 | Shree Dev-Shastra-Guru Pujan-3 |
| 5 | श्री सिद्ध पूजन | 12 | श्री सिद्ध पूजन । Shree Siddh Pujan |
| 6 | श्री महावीर पूजन | 16 | श्री महावीर पूजन । Shree Mahaveer Pujan |
| 7 | श्री सीमन्धर पूजन | 21 | श्री सीमंधर पूजन । Shree Seemandhar Poojan |
| 8 | बारह भावना | 25 | बारह भावना (भोर की स्वर्णिम) | Barah Bhavna (bhor ki swarnim) |
| 9 | कुन्दकुन्दशतक पद्यानुवाद | 34 | कुन्दकुन्द शतक | Kundkund Shatak |
| 10 | शुद्धात्मशतक पद्यानुवाद | 42 | इसी पीडीएफ में |
| 11 | समयसार पद्यानुवाद (गाथा 1 से 416, 9 अधिकार) | 50 | समयसार पद्यानुवाद | Samaysar Padyanuvad |
| 12 | समयसार कलश पद्यानुवाद (कलश 1 से 278) | 83 | इसी पीडीएफ में |
| 13 | प्रवचनसार पद्यानुवाद (गाथा 1 से 275) | 130 | प्रवचनसार पद्यानुवाद । Pravachansar Padyanuvad |
| 14 | प्रवचनसार कलश पद्यानुवाद | 155 | प्रवचनसार कलश पद्यानुवाद । Pravachansar kalash padyanuvad |
| 15 | अष्टपाहुड पद्यानुवाद (दर्शन, सूत्र, चारित्र, बोध, भाव, मोक्ष, लिंग, शील पाहुड) | 160 | इसी पीडीएफ में |
| 16 | योगसार पद्यानुवाद | 200 | इसी पीडीएफ में |
| 17 | द्रव्यसंग्रह पद्यानुवाद | 208 | द्रव्यसंग्रह पद्यानुवाद | Dravyasangrah Padyanuvad |
(जिन रचनाओं का फोरम लिंक दिया है, वे फोरम पर अलग विषय के रूप में पहले से हैं; बाकी पूरी पुस्तक नीचे की पीडीएफ में है।)
नीचे पूरी पुस्तक की पीडीएफ है।
स्रोत: adhyatm-navneet-bharill.pdf
adhyatm-navneet-bharill.pdf (333 KB)
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