आचार्य विद्यानन्द निबन्धावली
मूल रचना: आचार्य विद्यानन्द मुनिराज
सम्पादक: प्रो. वीरसागर जैन
अर्थ-सौजन्य : श्री नरेश चन्द जैन (कामाधेनु सरिया), वसन्त विहार, नई दिल्ली
प्रकाशक: कुन्दकुन्द भारती
अक्टूबर, 2019 ई., 1000 प्रतियाँ
अनुक्रमणिका
- प्रस्तावना
- सम्पादकीय
- प्रथम खंड : धर्म, दर्शन एवं अध्यात्म
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- मूल-महामन्त्र
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- निर्मल आत्मा ही समयसार
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- ईश्वर कहाँ है?
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- आदि कृषिकिशक भगवान् आदिनाथ
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- तीर्थंकर महावीर
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- सर्वोदय तीर्थादिदेव
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- जगद्गुरु
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- जिनदर्शन-जिनपूजा
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- जैनशासन का पंचरंगी ध्वज
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- अनेकान्त और स्याद्वाद
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- उत्तम संयम और महाव्रत
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- अर्हत् योग आचार्य
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- अहिंसा एवं गांधीदर्शन
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- जैनधर्म, अहिंसा एवं महात्मा गांधी
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- देव और पुरुषार्थ
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- अग्नि और जीवोत्पत्ति
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- वैदिक व श्रमण साहित्य में न्यास
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- सुलतान को अर्थ देना चाहिए?
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- “स्वाहा” पद की गुत्थी
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- मूलादों का अस्तित्व
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- मित्र गुणस्थान वाला भी एकदेश जिन है
- द्वितीय खंड : संस्कृति, समाज, राष्ट्र और इतिहास
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- श्रमण-संस्कृति और उसकी उपलब्धियाँ
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- गो रक्षा से अहिंसक संस्कृति की रक्षा
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- आर्य परम्परा में आत्मिक दीक्षा
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- मुनिभक्त श्रेष्ठावलियों का शास्त्रोक्त स्वरूप
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- विश्व अहिंसा दिवस
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- अपरिग्रह से भ्रष्टाचार-उन्मूलन
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- जैन समाज और वात्सल्य भाव
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- पुरुष और स्त्रियों का समाज में स्थान और कर्तव्य
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- पावन पर्व : रक्षाबन्धन
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- राष्ट्रीय पर्व : दीपावली
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- सोने का पिंजरा
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- संयुक्त बालदीपक
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- विश्वकर्मा एवं वास्तु-विद्या
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- मोहन-जी-दड़ो : जैन परम्परा और प्रमाण
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- कल्याण मुनि और सम्राट सिकन्दर
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- बाहुबली की राजधानी तक्षशिला
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- धर्म-निरपेक्ष नहीं, सम्प्रदाय-निरपेक्ष
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- ब्राह्मणों व विद्वानों को त्यागियों/श्रमणों की समीक्षा का अधिकार
- तृतीय खंड : ध्यान, साधना और व्यक्तिगत विकास
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- प्रतीकीकरण और निर्विकल्प ध्यान
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- आत्मदर्शन : आत्मा को अपने से विकास
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- शब्द-साधना
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- अकार्यादि अक्षर : वर्ण तथा फल
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- मूलमुद्रि : वादीक्षा
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- पहिले तोलो, फिर बोलो
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- स्वाध्याय
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- अभीक्षा ज्ञानोपयोग
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- जल का आधार घट, ज्ञान का आधार सरस्वती
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- सद्धर्मनाथ लघु धर्मसाधनम्
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- सम्यग्ज्ञान और मुनि
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- समय का मूल्य
- परिशिष्ट
- सन्दर्भ-ग्रन्थ-सूची
पूरी पुस्तक (PDF): आचार्य_विद्यानन्द_निबंधावलि.pdf (3.5 MB)