आये आये रे जिनन्दा । Aaye Aaye Re Jinanda

आये आये रे जिनन्दा, आये रे जिनन्दा, तोरी शरण में आये।
कैसे पावें, कैसे पावें तुम्हारे गुण गावें रे,
मोह में मारे मारे, भव भव में गोते खाये,
तोरी शरण में आये ।।टेक।।

जग झूठे से प्रीत लगाई, पाप किये मनमाने।
सद्गुरु वाणी कभी न मानी, लागे भ्रमरोग सुहाने ।।

कैसे पावें, कैसे पावें तुम्हारे गुण गावें रे,
मोह में मारे मारे, भव भव में गोते खाये ।। तोरी शरण में आये…।।1।।

आज मूल की भूल मिटी है, तव दर्शन से स्वामी।
तत्त्व चराचर लगे झलकने, घट घट अंतर्यामी ।।

कैसे पावें, कैसे पावें तुम्हारे गुण गावें रे,
मोह में मारे मारे, भव भव में गोते खाये ।। तोरी शरण में आये…।।2।।

जन्म-मरण रहित पद पावन, तुम-सा नाथ सुहाया।
वो सौभाग्य मिले गर सत्वर, मोक्ष महल मन भाया।।

कैसे पावें, कैसे पावें तुम्हारे गुण गावें रे,
मोह में मारे मारे, भव भव में गोते खाये ।। तोरी शरण में आये…।।3।।

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