आतम अनुभव सार हो | Aatam Anubhav Saar Ho

आतम अनुभव सार हो, अब जिय सार हो, प्राणी
विषय भोगफेणने तोहि काट्यो, मोह लहर चढ़ी भार हो ।।आतम. ।।१ ।।
याको मंत्र ज्ञान है भाई, जप तप लहरिउतार हो ।।आतम. ।।२ ।।
जनमजरामृत रोग महा ये, तैं दुख सह्यो अपार हो ।।आतम. ।।३ ।।
`द्यानत’ अनुभव-औषध पीके, अमर होय भव पार हो ।।आतम. ।।४ ।।

Artist: कविवर द्यानतराय जी

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अर्थ

आत्मा का अनुभव होना सार है, महत्वपूर्ण है। इसलिए हे जीव! यह ही जीवन का सार है।

विषय भोगरूपी सर्पों के फ़णों से काटे जाने के कारण तुझ पर मोह की गहल/नशा, एक लहर चढ़ रही है।

इसका किस प्रकार निवारण किया जाए - इसके लिए एकमात्र सशक्त उपाय ज्ञान है, जिसके अनुरूप जप-तप से मोहरूपी/विषय-भोगरूपी सर्पदंश का जहर उतर जाता है।

जन्म, बुढ़ापा और मृत्यु - ये महान रोग हैं इनके कारण मैंने बहुत दु:ख सहे हैं।

द्यानतराय कहते हैं कि अनुभव-ज्ञानरूपी औषधि पीकर तू भवसागर के पार होकर अमर हो जा।

Source- द्यानत भजन सौरभ

इसका क्या अर्थ हुआ विषय भोग के कारण मोह का जहर है??:thinking: