भजन: आज हम मंगल कारज है कीना
रचयिता: ब्र. सुमतप्रकाश जी
आज हम मंगल कारज है कीना,
आज हम मंगल कारज कीना।
आनंदमयी प्रभुता के पथ में, आनंदमयी…
प्रभुता के पथ में अब हमने चित दीना।
आज हम मंगल कारज है कीना,
आज हम मंगल कारज है कीना।
उपयोग संभरते देखत छूटा,
उपयोग संभरते देखत छूटा, करमन को पसीना।
आज हम मंगल कारज है कीना,
आज हम मंगल कारज है कीना।
मुक्त स्वरूप सहज आनंद में,
मुक्त स्वरूप सहज आनंद में, बंधे न कर्म नवीना।
आज हम मंगल कारज है कीना,
आज हम मंगल कारज है कीना।
समकित रतन सु निधियां पाकर,
पाकर समकित रतन सु निधियां…
पाकर हो गए मोक्ष प्रवीणा।
आज हम मंगल कारज है कीना,
आज हम मंगल कारज है कीना-३