आज अगर महावीर न होते | Aaj Agar Mahavir Naa Hote

आज अगर महावीर न होते कुंदकुंद फिर कैसे आते ?
कुंदकुंद आचार्य न होते अमृतचनद्र कहाँ से आते ?
अमृतचन्द्राचार्य न होते गुरूवर कहान कहाँ से आते ?
यह परंपरा न होती तो, सद्उपदेश कहाँ से पाते ?
नमन कर गुरू चरणन में, नमन कर गुरू चरणन में ।। 1 ।।
(प्राचार्य)
कुंदकुंद जैसे कुंदन से कुंदकुंद आचार्य हुए हैं ।
अमृत को बरसाने वाले अमृतचन्द्राचार्य हुए हैं ।
कौन जानता कुंदकुंद और अमृतचन्द्राचार्य देव को ।
सबका बोध कराने वाले गुरू कहान प्राचार्य हुए हैं ।
नमन कर गुरू चरणन में, नमन कर गुरू चरणन में ।। 2 ।।
(खोजी गुरूवर)
कल्पवृक्ष सब जगह न मिलते, चिन्तामणि सब रत्न न होते ।
देव बहुत होते हैं पर श्री जिनेन्द्र से देव न होते ।
सभी मणि पारसमणि हैं क्या ? सभी धातु कंचन नहीं होती ।
गुरूवर बोले अंतर खोजो, चमक रही है ज्ञायक ज्योति ।
नमन कर गुरू चरणन में,
नमन कर गुरू चरणन में ।। 3 ।।
(समयसार वेत्ता)
समयसार के छिपे रहस्यों को किसने जीवन में खोला ।
श्रुत समुद्र की अनुपम निधियों का अमृत जीवन में घोला ।
श्वांस-श्वांस में सदा किया किसने चैतन्य राज अभिनंदन ।
वे थे गुरूवर श्री कहान, उनको मेरा शत शत अभिनंदन ।
नमन कर गुरू चरणन में,
नमन कर गुरू चरणन में ।। 4 ।।
(चैतन्य चक्रवर्ती)
गुरूवर जहाँ-जहाँ जाते थे क्रियाकांड ही दिखता था ।
धर्म नाम पर शुभाचार ही मोक्षमार्ग माना जाता था ।
भाव शुभाशुभ स्वांग दिखाकर ऊर्ध्व ज्ञान का भान कराया ।
भेद ज्ञान का चक्र सुदर्शन से अखंड साम्राज्य दिलाया ।
नमन कर गुरू चरणन में,
नमन कर गुरू चरणन में ।। 5 ।।
तेरी वचन वर्गणा सुनते ही खुल जाते ज्ञान नयन ।
जिसकी होनहार अच्छी थी वे सुनते ही हुए मगन ।
कर्ता करम भ्रांति सब मेंटी भवाताप सब हुआ शमन ।
गुरूवर श्री कहान धन्य हैं, बाल वैद्य शत-शत वंदन ।
नमन कर गुरू चरणन में,
नमन कर गुरू चरणन में ।। 6 ।।
(निश्छल पराक्रमी)
हे गुरूदेव आपने आकर आतम को भगवान बताया ।
महापाप मिथ्यात्व मिटाने तत्त्वज्ञान का बिगुल बजाया ।
चार इंच की मुँह पट्टी भी फाड़ फेंक दी क्षण भर में ।
जिन शासन में छल न चलेगा सम्प्रदाय छोड़ा पल में ।
नमन कर गुरू चरणन में,
नमन कर गुरू चरणन में ।। 7 ।।
मोहनीय से हमें जगाने तुमने बिगुल बजाया सुंदर ।
राग रंग का राग मिटाने तुमने गाये गीत मनोहर ।
मुक्तिदूत गुरुवर कहान का, आज चूल आमंत्रण आया ।
मुक्ति महोत्सव के मंडप में, सिद्धों के संग हमें बुलाया ।
नमन कर गुरू चरणन में,
नमन कर गुरू चरणन में ।। 8 ।।
(विद्यागुरु)
आप हमारे विद्या गुरू थे
आप हमारे प्राण थे ।
कुंदकुंद से भेंट कराने वाले गुरू कहान थे ।
कहते थे दासानुदास हूँ, मैं मुनियों का हे भगवान ।
धन्य भाग जब दर्शन पाऊँ, कहते थे मुनि भक्त कहान ।
नमन कर गुरू चरणन में,
नमन कर गुरू चरणन में ।। 9 ।।
Artist: पण्डित श्री राजेन्द्र कुमार जी, जबलपुर

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