आचार्य कुन्दकुन्द श्री भारत में फिर आओ
आचार्य कुन्दकुन्द श्री, भारत में फिर आओ।
अध्यात्म का संदेश शुभ, प्रत्यक्ष सुनाओ ॥टेक॥
मनमाने ढंग से हो रहा है, पक्ष का पोषण।
जिनवाणी की अवहेलना, जिनमार्ग का शोषण॥
पक्षातिक्रान्त स्वानुभूत मार्ग दिखाओ ।।1।।
पुज रहे हैं अव्रती भी गुरु की तरह आज।
गुरु वेश धार कर भी कोई पोषे शिथिलाचार।
आदर्श गुरु स्वरूप अब प्रत्यक्ष दिखाओ ॥2॥
कोई पुण्य भाव को ही मुक्तिमार्ग जानते।
जड़ देह की क्रिया को ही सर्वस्व मानते॥
कोई हो रहे स्वच्छन्द गुरु विवेक जगाओ ॥3॥
अविनाशी ज्ञान सुख का आधार आत्मा।
पर्यायों के स्वाँगों से पार शुद्ध आत्मा।
और आत्मानुभव की विधि सहज बताओ ॥4॥
ध्रुव आत्मा ही विश्व में इक सार दिखाया।
आराधना का भाव भी है सहज जगाया॥
ध्याऊँ सु ध्येय रूप साक्षी आप रहाओ ॥5॥
आधार हो मेरे तुम्हीं इस दुषम काल में।
निरपेक्ष हो निर्द्वन्द्व हो, वर्तूं स्व काल में॥
ऋषिराज भावन मन, उर में मेरे बसाओ ॥6॥
• श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji ‘Aatman’
Singer - Swayam Jain, Sihor Bhopal
Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon