शान्ति पाठ-4
परम शान्ति पाऊँ प्रभो, करूँ स्वयं का ज्ञान ।
रागद्वेष पर भाव हर, करूँ स्वयं का ध्यान ।।
सकल जगत् के जीव सब, पाएं शान्ति महान् ।
दुखी न कोई जीव हो, सब का हो कल्याण ।।
ईति भीति भय नष्ट हों, वर्षा हो अनुकूल ।
पाप भाव सब नष्ट हों, दुख जाएं सब भूल ।।
सदाचार पालन करें, जागे निज हित बुद्धि ।
आप कृपा से प्राप्त हो, धीरे-धीरे शुद्धि ।।
परम शान्ति सुख सिन्धु हो, वीतराग भगवान् ।
तुव समान हम सब बनें, है यह विनय महान् ।।
ॐ शान्ति! शान्ति! शान्ति!
स्रोत: करलो जिनवर की पूजन (पंडित सदासुख ग्रन्थमाला, अजमेर), पृष्ठ ४०० से ४०४