वे कौन थे - जैन स्वाध्याय सामग्री | Ve Kaun The

वे कौन थे

वे कौन थे…

  1. जिनके ऊपर जलती सिगड़ी रखती गई - गजकुमार
  2. जिन्हें जलते हुए गहने पहनाए गए - पाण्डव
  3. जिन्होंने मरणासन्न कुत्ते को णमोकार मंत्र सुनाया - जीवनधर स्वामी
  4. जिन्होंने आपत्परीक्षा ग्रन्थ लिखा - विद्यानन्दि आचार्य
  5. जिन्हें हाथी पर बैठे-बैठे वैराग्य हुआ - राजा भद्रु
  6. जो णमोकार मंत्र के अपमान से नरक गए - सुभूमि चक्र
  7. यक्षोश्वर मुनि के गले में मृत सर्प डाला - श्रेणिक राजा
  8. जिन्हें भस्मक व्याधि हुई - समन्तभद्र
  9. नाटक समयसार की रचना की - बनारसीदास जी
  10. संवर देव ने इन पर उपसर्ग किया था - मुनि पार्श्वनाथ
  11. जिनका उपसर्ग राम-लक्ष्मण ने दूर किया था - द्वाद्शभूषण मुनिराज
  12. इस युग में प्रथम मोक्ष गए - अनन्तवीर्य
  13. जो दीक्षा के अंतर्मुहूर्त बाद केवलज्ञानी हो गए - भरत
  14. जिन पर स्त्रीनिंद ने उपसर्ग किया - मुनि राम
  15. जिन्हें 48 तालों में बंद रखा गया - मानतुंग आचार्य
  16. जो मुनि विदेह क्षेत्र गए थे - कुन्दकुन्द आचार्य
  17. जिन्हें तीन दिन तक भिलायनी छाती रही - सुकुमाल
  18. जिनका बाघिन ने भक्षण किया - सुकौशल

Notes

  1. जिन्हे वन में नगर बसाकर आहार दिया - चन्द्रगुप्त

  2. जिनके निमित्त से द्वारिका नगरी जली - द्वीपायनमुनि

  3. जिन्होंने निमित्तज्ञान से बारहवर्षीय अकाल की घोषणा की - आचार्य भद्रबाहु

  4. प्रथम सूत्रात्मक जैन ग्रन्थ लिखा - उमास्वामी

  5. प्रथम जैनग्रन्थ लिखा - भूतबली-पुष्पदन्त आचार्य

  6. जिनके पांचोकल्याणक एक स्थान पर हुए - वासुपूज्य

  7. जिनकी रक्षा सुअर ने की -

  8. जिनसे सम्राट चन्द्रगुप्त ने 16 स्वप्नों का फल पूछा - आचार्य भद्रबाहु

  9. जिनके पैर की धूल से पर्वत सोने का हो गया था - शुभचन्द्राचार्य

  10. जिनसे दशारण ने दीक्षा ली -

  11. सर्वप्रथम जय जिनेन्द्र उच्चारण करने वाले - भद्रबाहु

  12. पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत दबाने वाले - बालि मुनि

  13. सबसे कम समय में केवली हुए तीर्थंकर - मल्लिनाथ

  14. अन्तिम अनुबद्ध केवली - जम्बूस्वामी

  15. जो पुरोहित पुत्र भद्रबाहु की भांति श्रुतकेवली जानकर अपने साथ ले गए - जम्बूस्वामी ओवइणाचार्य

  16. अन्तिम श्रुतकेवली - जम्बूस्वामी

  17. आजीवन जिन्होंने कपड़े नहीं पहने - जिनसेन

  18. कड़वी तुम्बी का विषममय आहार दिया गया -

  19. इनके काल में श्वेताम्बर मत प्रारम्भ हुआ - भद्रबाहु

  20. जिनसे क्रूर भील ने अहिंसाव्रत लिया -

  21. रोग निवारण हेतु मुनिपद छोड़ा - समन्तभद्र

  22. जिन्होंने लवकुश को दीक्षा दी -

  23. 100 बजेनों को जैन बनाकर आहार का जिन्होंने नियम लिया -

  24. जिनसे रावण ने परस्त्रीत्याग व्रत लिया - यमनंतवीर्य

  25. दो बकरों की बलि से बचाकर अपना स्वर्ग करवाया -

  26. राजा के कहने पर मुनिपद लिया - ब्रह्मगुलाल

  27. चन्द्रगुप्त को जैनधर्म में दीक्षित किया - भद्रबाहु

  28. 500 पुत्रों के साथ दीक्षा ली -

  29. कुन्दकुन्द को दीक्षा देने वाले - जिनचन्द्र आचार्य

  30. जिनसे चाणक्य ने दीक्षा ली -

  31. क्षण शब्द का 6 माह तक अर्थ किया -

  32. जिन्हें स्वीकार हनुमान् ने गया - कल्याण मुनि

  33. वेश्या के कोठे पर तीन दिन का उपवास -

  34. सर्प के मुंह में मेंढक देखकर वैराग्य - पूज्यपाद

  35. एक ही आसन पर खड़े-खड़े चार माह का उपवास - गणधर मुनि

  36. अर्द्धरात्री में 12 भावनाओं का पाठ सुनकर वैराग्य आ
    पत्नियों की साड़ियों की रस्सी बनाकर महल से उतरकर

Notes

मुनि बन गए - सुकुमाल
55. अपने घर में चोरी करते हुए चोर की सहायता की - पं. बनारसी दास्य जी
56. जिन्हें हाथी के पैर के नीचे कुचला गया - टोडरमल जी
57. श्रवणबेलगोला में बाहुबाल की मूर्ति बनवाई - चामुण्डराय
58. 363 पाखण्ड मत चलाए - मारीच
59. विवाह के अगले दिन दीक्षा ली - जम्बू स्वामी
60. धर्मप्रभावना हेतु अपनी जान दे कर भाई को बचाया - निकलंक
61. अपनी बहन पर मोहित हुए - देशभूषण - कुलभूषण
62. जिनके गिरने पर शिला चूर चूर हो गई - हनुमान्
63. जिनकी श्वास से शिला हिलती है - प्रद्युम्न कुमार
64. जिन्हें लंका में केवलज्ञान प्राप्त हुआ - अनंतवीर्य
65. अपने 60 हजार पुत्रों की मृत्यु का समाचार सुनकर अजितनाथ मुनि से दीक्षा ली - सगर चक्रवर्ती
66. जिनके पिता व पुत्र कामदेव थे - कृष्ण
67. प्रतिदिन 100 अजैनों को जैन बनाने का नियम लिया - जिनसेन
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:paperclip: मूल दस्तावेज़ (PDF): 191.pdf

स्रोत: Gyata संग्रह।

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