वे कौन थे
वे कौन थे…
- जिनके ऊपर जलती सिगड़ी रखती गई - गजकुमार
- जिन्हें जलते हुए गहने पहनाए गए - पाण्डव
- जिन्होंने मरणासन्न कुत्ते को णमोकार मंत्र सुनाया - जीवनधर स्वामी
- जिन्होंने आपत्परीक्षा ग्रन्थ लिखा - विद्यानन्दि आचार्य
- जिन्हें हाथी पर बैठे-बैठे वैराग्य हुआ - राजा भद्रु
- जो णमोकार मंत्र के अपमान से नरक गए - सुभूमि चक्र
- यक्षोश्वर मुनि के गले में मृत सर्प डाला - श्रेणिक राजा
- जिन्हें भस्मक व्याधि हुई - समन्तभद्र
- नाटक समयसार की रचना की - बनारसीदास जी
- संवर देव ने इन पर उपसर्ग किया था - मुनि पार्श्वनाथ
- जिनका उपसर्ग राम-लक्ष्मण ने दूर किया था - द्वाद्शभूषण मुनिराज
- इस युग में प्रथम मोक्ष गए - अनन्तवीर्य
- जो दीक्षा के अंतर्मुहूर्त बाद केवलज्ञानी हो गए - भरत
- जिन पर स्त्रीनिंद ने उपसर्ग किया - मुनि राम
- जिन्हें 48 तालों में बंद रखा गया - मानतुंग आचार्य
- जो मुनि विदेह क्षेत्र गए थे - कुन्दकुन्द आचार्य
- जिन्हें तीन दिन तक भिलायनी छाती रही - सुकुमाल
- जिनका बाघिन ने भक्षण किया - सुकौशल
Notes
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जिन्हे वन में नगर बसाकर आहार दिया - चन्द्रगुप्त
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जिनके निमित्त से द्वारिका नगरी जली - द्वीपायनमुनि
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जिन्होंने निमित्तज्ञान से बारहवर्षीय अकाल की घोषणा की - आचार्य भद्रबाहु
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प्रथम सूत्रात्मक जैन ग्रन्थ लिखा - उमास्वामी
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प्रथम जैनग्रन्थ लिखा - भूतबली-पुष्पदन्त आचार्य
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जिनके पांचोकल्याणक एक स्थान पर हुए - वासुपूज्य
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जिनकी रक्षा सुअर ने की -
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जिनसे सम्राट चन्द्रगुप्त ने 16 स्वप्नों का फल पूछा - आचार्य भद्रबाहु
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जिनके पैर की धूल से पर्वत सोने का हो गया था - शुभचन्द्राचार्य
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जिनसे दशारण ने दीक्षा ली -
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सर्वप्रथम जय जिनेन्द्र उच्चारण करने वाले - भद्रबाहु
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पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत दबाने वाले - बालि मुनि
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सबसे कम समय में केवली हुए तीर्थंकर - मल्लिनाथ
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अन्तिम अनुबद्ध केवली - जम्बूस्वामी
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जो पुरोहित पुत्र भद्रबाहु की भांति श्रुतकेवली जानकर अपने साथ ले गए - जम्बूस्वामी ओवइणाचार्य
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अन्तिम श्रुतकेवली - जम्बूस्वामी
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आजीवन जिन्होंने कपड़े नहीं पहने - जिनसेन
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कड़वी तुम्बी का विषममय आहार दिया गया -
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इनके काल में श्वेताम्बर मत प्रारम्भ हुआ - भद्रबाहु
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जिनसे क्रूर भील ने अहिंसाव्रत लिया -
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रोग निवारण हेतु मुनिपद छोड़ा - समन्तभद्र
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जिन्होंने लवकुश को दीक्षा दी -
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100 बजेनों को जैन बनाकर आहार का जिन्होंने नियम लिया -
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जिनसे रावण ने परस्त्रीत्याग व्रत लिया - यमनंतवीर्य
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दो बकरों की बलि से बचाकर अपना स्वर्ग करवाया -
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राजा के कहने पर मुनिपद लिया - ब्रह्मगुलाल
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चन्द्रगुप्त को जैनधर्म में दीक्षित किया - भद्रबाहु
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500 पुत्रों के साथ दीक्षा ली -
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कुन्दकुन्द को दीक्षा देने वाले - जिनचन्द्र आचार्य
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जिनसे चाणक्य ने दीक्षा ली -
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क्षण शब्द का 6 माह तक अर्थ किया -
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जिन्हें स्वीकार हनुमान् ने गया - कल्याण मुनि
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वेश्या के कोठे पर तीन दिन का उपवास -
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सर्प के मुंह में मेंढक देखकर वैराग्य - पूज्यपाद
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एक ही आसन पर खड़े-खड़े चार माह का उपवास - गणधर मुनि
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अर्द्धरात्री में 12 भावनाओं का पाठ सुनकर वैराग्य आ
पत्नियों की साड़ियों की रस्सी बनाकर महल से उतरकर
Notes
मुनि बन गए - सुकुमाल
55. अपने घर में चोरी करते हुए चोर की सहायता की - पं. बनारसी दास्य जी
56. जिन्हें हाथी के पैर के नीचे कुचला गया - टोडरमल जी
57. श्रवणबेलगोला में बाहुबाल की मूर्ति बनवाई - चामुण्डराय
58. 363 पाखण्ड मत चलाए - मारीच
59. विवाह के अगले दिन दीक्षा ली - जम्बू स्वामी
60. धर्मप्रभावना हेतु अपनी जान दे कर भाई को बचाया - निकलंक
61. अपनी बहन पर मोहित हुए - देशभूषण - कुलभूषण
62. जिनके गिरने पर शिला चूर चूर हो गई - हनुमान्
63. जिनकी श्वास से शिला हिलती है - प्रद्युम्न कुमार
64. जिन्हें लंका में केवलज्ञान प्राप्त हुआ - अनंतवीर्य
65. अपने 60 हजार पुत्रों की मृत्यु का समाचार सुनकर अजितनाथ मुनि से दीक्षा ली - सगर चक्रवर्ती
66. जिनके पिता व पुत्र कामदेव थे - कृष्ण
67. प्रतिदिन 100 अजैनों को जैन बनाने का नियम लिया - जिनसेन
68.
मूल दस्तावेज़ (PDF): 191.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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