वे कौन थे ?
- यह ग्रंथ का अंश है; पूर्ण ग्रंथ नीचे संलग्न PDF में उपलब्ध है -
Round 1
वे कौन थे ?
प्रश्नोत्तरी
वे कौन थे जिन्होंने धर्म प्रभावना हेतू स्वयं बलिदान देकर अपने भाई के प्राणों की रक्षा की थी ???
शीर्षक
निकलंक
प्रश्नोत्तरी
वे कौन थे जिन्होंने अपने घर में चोरी करते हुए चोर की भी सहायता की थी ???
उत्तर
पं बनारसीदासजी
प्रश्नोत्तरी
वे कौन थे जिन्होंने अपने विवाह के अगले दिन ही दीक्षा धारण की थी ???
जम्बूस्वामी
प्रश्नोत्तरी
वे कौन थे जिनके पिता और पुत्र दोनों कामदेव थे
???
श्रीकृष्ण
वे को थे जो अपने भाई की मृत्यु की खबर सुनके
स्वयं मृत्यु को प्राप्त हो गए थे ???
लक्ष्मण
नन्दा और सुनन्दा के ससुर जी कोन थे ???
राजा नाभिराय
प्रश्नोत्तरी
वे कौन थे जिनके निमित्त से द्वारिका जल कर भस्म हो गयी थी ???
दविपायन मुनि
प्रश्नोत्तरी
सबसे कम समय में केवली हुये तीर्थंकर कोन थे ???
उत्तर
मल्लिनाथ जी
प्रश्नोत्तरी
वे कोन थे जिन्होने पूर्व भाव में ग्वाले की पर्याय में मुनिराज को शास्त्र दान दिया ???
कुन्दकुंद स्वामी
वे कौन थे जो झूठ बोलने के कारण सिंहासन सहित नरक में गए थे …???
राजा वसु
Round 2
सबसे स्मार्ट कौन ?
कौनसा रंग सही नहीं है
जो जीव है उसको पहचाने
प्रश्नोत्तरी
“निज निधि निज में बताई यह अनंत उपकार है”
पंक्ति में किसका उपकार बताया है?
A.
B.
C.
D.
प्रश्नोत्तरी
वायु एकेन्द्रिय जीव है, तो हवा की छोड़ के वायुकायिक जीव कहां है।
प्रश्नोत्तरी
28 मूलगुण का पालन कौन करता है
- सम्यक दर्शन की प्राप्ति में अपात्र जीव।
इसमें तिर्यंच गति के कितने जीव है
1 2 3
धर्म द्रव्य किसमें निमित है
प्रश्नोत्तरी
तीन लोक कहाँ झलक रहे है
कौनसा रंग कृष्ण लेश्या को दर्शाता है
Round 3
हमारे ग्रन्थ
- यह ग्रन्थ अपूर्ण ही रह गया था
- इस ग्रंथ में 9 अधिकार हैं
- यह ग्रन्थ मूलतः ढूंढ़ारी भाषा
में लिखा गया था, बाद में बहुत
सी भाषाओं में इसके अनुवाद हुए - इस ग्रन्थ के लेखक को हाथी
के पैर के नीचे कुचल वा दिया
गया था
मोक्षमार्ग प्रकाशक
- इस ग्रंथ को दो आचार्यों ने लिखा था
- यह प्रथम शताब्दी में लिखा गया था
- इस ग्रंथ के लेखकों के गुरु
आचार्य धरसेन थे - इस ग्रंथ में 6 खण्ड हैं
- इस ग्रन्थ का मंगलाचरण
णमोकार मंत्र है
षट्खंडागम
- यह चरणानुयोग का बहुत ही प्रसिद्ध ग्रन्थ है
- इस ग्रन्थ में 8 अधिकार है
- इस ग्रन्थ के लेखक द्वारा अरहंत भगवान की भी परीक्षा की गई है।
- इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य को भस्मक व्याधि रोग भी हो गया था
रत्नकरंड श्रावकाचार
- इस ग्रन्थ के लेखक का दुसरा
ग्रन्थ समाधितन्त्र भी है - इसमें कुल 51 श्लोक ही हैं।
- इस ग्रन्थ के अंत में जीव
जुदा पुद्गल जुदा, यही तत्त्व
का सार बताया गया है - यह आचार्य पूज्यपाद स्वामि
द्वारा रचित ग्रन्थ है।
- अंश यहाँ समाप्त; पूर्ण ग्रंथ के लिए नीचे संलग्न PDF देखें -
मूल दस्तावेज़ (PDF): 2589.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
प्रूफरीडिंग बाकी है