उत्तम मार्दव व्रत
उत्तम मार्दव धर्म
-
मार्दव धर्म आत्मा का कौन सा भाव है?
A. स्वभाव
B. विभाव
C. अभाव
D. शुभभाव -
मार्दवधर्म किस कषाय के अभाव होने पर प्रकट होता है?
A. क्रोध
B. मान
C. माया
D. लोभ -
मान कषाय को जीतने का उपाय है?
A. छल-कपट
B. विनय/मार्दवगुण
C. क्रोध
D. लोभ -
उद्दत होकर अभिमान में चलना, बैठना, अँगना, बोलना किसका प्रतीक है?
A. मार्दव गुण
B. मान कषाय
C. सरलता
D. सहजता -
उत्तमपुरुष उद्दत्तता के वस्त्र आभरण पहनते हैं?
A. हाँ
B. नहीं
C. उक्त दोनों
D. दोनों में से कोई नहीं -
संसारी जीवों को अनादिकाल से उद्दत्त हो रहा है?
A. सम्यग्दर्शन
B. मिथ्यादर्शन
C. सम्यग्ज्ञान
D. दर्शन -
अपराध किये बिना ही समस्त लोग वैरी हो जाते हैं किसके?
A. सज्जन
B. अभिमानी के
C. बालक के
D. वृद्ध के -
आत्मा और मान कषाय में भेद को अनुभव करके मान को छोड़ना उसका नाम है?
A. मान कषाय
B. मार्दवगुण
C. क्रोध
D. माया -
मार्दवगुण के द्वारा नाश होता है?
A. घृणा का
B. शुभभाव का
C. मान कषाय का
D. धर्म का -
मार्दवगुण अर्थात् विनय के द्वारा दण्ड मिलता है किसको?
A. पाँच इन्द्रियों
B. मन
C. उद्दण्डता को
D. उत्तम संयम को -
अभिमानी के मूल से ही अभाव है?
A. कठोरता
B. रागभाव का
C. दयाधर्म का
D. मिथ्यात्व का -
वह कौन सा गुण है जिसके अभाव में व्रत पालना, संयम धारण करना, ज्ञान का अभ्यास करना सब निष्फल है?
A. क्रोध
B. मान
C. मार्दव
D. माया -
अज्ञानी जीव जिसके आश्रय से मद करते हैं, जिनवाणी में उनका कितने प्रकार का कहा है?
A. चार
B. आठ
C. छह द्रव्य
D. सात तत्व -
हीन-उच्च ज्ञान के आधार पर अपने को ज्ञानी मानना है?
A. जाति मद
B. ज्ञान मद
C. कुल मद
D. रूप मद -
कौन परिणामों द्वारा सिद्धि होती है?
A. इहलोक की
B. परलोक की
C. दोनों लोक की
D. स्वर्ग नरक की -
मान कषाय से इस जीव को लाभ है?
A. उच्च पद का
B. स्वाभिमान का
C. संसार भ्रमण का
D. सुखरूपन का -
मेरे नाना बहुत बड़े उच्च पद पर हैं, ऐसा मानकर अपने को बड़ा मानना है?
A. कुल मद
B. जाति मद
C. ज्ञान मद
D. रूप मद -
मेरे बन्धु पिताजी प्रधानमंत्री व ऊँची के मित्र हैं इस आधार पर अपने को बड़ा मानना है?
A. बल मद
B. कुल मद
C. जाति मद
D. ज्ञान मद -
मेरा चेहरा बहुत सुन्दर है इस प्रकार शरीर के आश्रय से अपने को सुन्दर मानना है?
A. कुल मद
B. रूप मद
C. ज्ञान मद
D. बल मद -
मैंने तीन दिन का उपवास किया, उपवासक के आश्रय से अपने को बड़ा मानना है?
A. पूजा मद
B. तप मद
C. रूप मद
D. कुल मद
प्रश्नोत्तरी
-
पिता, गुरु, उपाध्याय, पुत्र को और शिष्य को के सा देखकर
आनंदित हो जाते हैं?
A. अभिमानी B. विनयवंत C. संपत्तिवान D. बलवान -
जिनकी हजारों देव सेवा करते में, उनका पुण्यसाम्य होने पर
कोई एक मनुष्य पापी देनावाला भी नहीं रहा?
A. सही B. गलत C. उक्त दोनों D. कोई नहीं -
जिनके मस्तक पर गुरु विराजमान हैं वे कैसे हैं?
A. भाग्यहीन B. देव C. धन्यभाग्य D. बलवान
उत्तम आर्जव धर्म
-
उत्तम आर्जवधर्म आत्मा का कौन-सा भाव है?
A. स्वभाव B. विभाव C. दुर्भाव D. अभाव -
आर्जव धर्म का अर्थ है?
A. कुटिलता B. सरलता C. ठगायाचारी D. लोभ -
आर्जवधर्म को धारण करने में होने वाली हानि का नाम बताओ
A. पाप का खण्डन B. कर्मकाक्षय C. कुटिलता का अभाव
D. उक्त सभी -
मन-वचन-काय की विरूपता को कहते हैं?
A. सरलता B. मायाचार C. सदाचार D. स्वेच्छता -
मन-वचन-काय की विरूपता वाले जीवो को कौन-सी
बात्य बाजी आती है होती है?
A. पुण्य B. पाप C. निस्वास D. माया E. वेदना -
जैसे कांजी डालने से दूध फट में जाता है उसी प्रकार प्रीति
भंग होती है किसकी?
A. सज्जन की B. मायाचारी की C. परिवार की
D. कुल की समाज की -
कपटी जीव कैसा है?
A. मित्रद्रोही B. धर्मद्रोही C. कृतघ्नी D. उक्त सभी -
जिनेंद्र भगवान् का धर्म कैसा है?
A. मायारहित B. छल-कपटसहित C. छल-कपट रहित
D. उक्त सभी -
जिस प्रकार टेढ़े म्यान में सीधी तलवार प्रवेश नहीं
करती है, उसी प्रकार वक्र परिणामों के हृदय में प्रवेश नहीं
करती है?
A. क्रोध B. लोभ C. आर्जवसरल धर्म
D. -
कपटी के दोनों लोक नष्ट हो जाते हैं/पूतन होते हैं?
A. सही B. गलत C. उक्त दोनों D. दोनों में से कोई
नहीं -
कपटरहित सरलचित्त वाले ने यदि कोई अपराध
भी किया हो तो भी वह किसके योग्य नहीं है?
A. पुरस्कार का B. ख्याति C. दण्ड D. लाभ -
आर्जवधर्म का धारक जीव संकल्प करता है?
A. आत्मानुभव का B. कषायजीतने C. संतोष धारण का
D. उक्त सभी -
छल-कपट ठगाई करने वाला जीव किसको
अपनाता है
A. धन B. सम्पदा C. कुटुम्ब D. उक्त सभी -
काय से स्वाध्याय में बैठना और मन में विचारना कि हे
भगवान् दुकान पर क्या हो रहा है -
मायाचाररूप कुटिल परिणामों से लाभ होता है?
A. ख्याति B. लाभ C. यश D. संसारपरिभ्रमण -
आर्जवधर्म का धारक जीव दूर से ही परिहार करता है?
A. स्वाध्याय का B. सामाजिक का C. जगत् के छलों का D. उक्त सभी -
आर्जवधर्म का धारक जीव आत्मा को कैसा जानता है?
A. असहाय B. चैतन्यमात्र C. उक्त दोनों D. दोनों में से
कोई नहीं -
मन-वचन-काय की एकरूपता को आर्जवधर्म किस अपेक्षा
से कहते हैं?
A. व्यवहारनय से B. निश्चयनय से C. उभयनय से D. जिननय से -
आत्मा का हित चाहनेवालों को अवलंबन लेना चाहिए
A. कुटिलता का B. कषाय का C. आर्जवधर्म का D. संसारदेह का -
कपटी जीव की प्रीति किसके समान कही जाती है?
A. शक्कर B. नीम C. बबूल D. भृंगार -
मायाचार रूप कुटिल परिणामों से द्वारा धन प्राप्ति की चाह
रखने से आत्मा को लाभ होता है किसका?
A. धन का B. स्वर्ण का C. कर्मबन्धन का D. यश का
उत्तम शौच
१. शौच धर्म किसके उज्ज्वल करने से प्रकट होता है?
अ. शरीर को ब. घर को स. आत्मा को द. वस्त्रों को
२. बहिरंग शौच किसे कहते हैं? मानते हैं?
अ. देह की उज्ज्वलता को ब. स्नानादि को
स. धन खर्च करने को द. उक्त सभी
३. आत्मा किस कारण से मलिन हो रही है?
अ. हिंसा से ब. लोभ से स. उक्त दोनों से द. पुण्य से
४. संसार में परिणामों को मलिन करने वाली है?
अ. परधन की इच्छा ब. परस्त्री की वांछा
स. भोजन की अतिलंपटता द. उक्त तीनों
५. जिनको पचास वर्ष हुए शास्त्र सुनते हो गये हैं, किन्तु जिन्हें धर्म के स्वरूप का ज्ञान नहीं हुआ है वह किसका फल है?
अ. अन्याय ब. अनीति स. अब्रह्म द. उक्त सभी
६. ऐसा कौन सा असंख्यात भवों तक करोगे तीर्थों में स्नान करने से, दान करने से, भी पाप का संतापकन दूर नहीं होता है किसका?
अ. धनिकों का ब. उपकार को लेने वाले स. स्वामी को ही द. उक्त सभी
७. श्रावकाचार जी में सदा ही मलिन किसे कहा है?
अ. देह को ब. परिवार को स. विश्वासघाती के समाज को
८. यदि अपनी आत्मा की पवित्रता चाहते हो, तो यह नहीं करो
अ. अन्याय धन का ग्रहण ब. अब्रह्म मैथुन स. परस्त्री की वांछा द. उक्त सभी
९. पाँच पापों में प्रवर्त्तने वाले जीव किस काल में मलिन होते हैं?
१. संध्याकाल में २. ब्रह्ममुहूर्त में ३. सदाकाल में
४. किसी-किसी काल में
१०. जो पर के उपकार को मानसिक लोभ करते हैं केवल हुए सदा ही मलिन है; उन्हें क्या कहते हैं?
अ. कृतघ्न ब. कृतधर्मी स. सज्जन द. भला आदमी
११. वीतराग सर्वज्ञ के परमागम का अनुभव करके अंतरंग मल का धोना वह शौचधर्म है?
अ. मिथ्यात्व मल ब. कषायमल स. उक्त दोनों द. अब्रह्म मल
१२. भोजन के लंपटी को अति अधम क्यों कहते हैं?
अ. अखाद्य वस्तु भी खाता है ब. हीनाचारी है, लोहे
स. लज्जा नष्ट हो जाती है द. उक्त सभी
१३. परिणामों में उत्तम पुरुषों के गुणों का चिंतन करने से आत्मा उज्ज्वल उत्पन्न होता है।
अ. सही ब. गलत स. उभय द. अनुपम
१४. उत्तम शौच धर्म आत्मा का कौन सा भाव है?
अ. स्वभाव ब. विभाव स. अभाव द. उक्त सभी
१५. उत्तम शौच धर्म किस कषाय के अभाव से प्रकट होता है?
अ. क्रोध ब. मान स. माया द. लोभ
१६. वह कौन सा जल है जिसके द्वारा तीव्र लोभरूप मल को धोया जाता है?
अ. समभाव रूपी जल ब. संतोष भाव रूपी स. उक्त दोनों
१७. ऐसे कोई दो कार्य, जिसके वशीभूत हुए जीव नरकगति के कारण महानिंद्य परिणामों को प्राप्त हो जाते हैं?
अ. जिह्वा इंद्रिय ब. उपस्थ इंद्रिय
स. उक्त दोनों द. कर्ण इंद्रिय
१८. कषायमल का अभाव करने से प्रकट होता है?
अ. स्वर्ग ब. महल स. शौचधर्म द. सुंदर शरीर
१९. वे कौन से जीव हैं जो करोंड़ों वर्षों तक समस्त शास्त्रों का पठन-पाठन करें तो भी उनके शुचिता कभी नहीं होती है?
अ. परस्त्री वांछक ब. परधन का वांछक स. जीवाघात करने वाले द. उक्त सभी
२०. शौच धर्म है?
अ. मोक्ष का मार्ग ब. मोक्ष का दाता स. उक्त दोनों द. संसार मार्ग
प्रश्नोत्तरी
- यह जीव अनन्तानन्त काल से रहा?
A. स्वर्ग में B. मोक्ष में C. मनुष्य में D. निगोद में - वचन बोलने की शक्ति प्रकट होती है?
A. त्रस में B. स्थावर में C. तिर्यंच में D. मनुष्य में - आभरण, वस्त्रादि कुकर, वानर, गधा, घोड़ा, ऊँट, भैंस व खादादि को भी मिलते हैं परन्तु ऐसी कौन-सी शक्ति है जो एक मनुष्य जन्म में ही संभव है?
A. चलने-फिरने की शक्ति B. उत्तर देने की शक्ति C. वचन की शक्ति D. उपयुक्त सभी - कर्मभूमि के मनुष्य तिर्यंच की अकाल मृत्यु नहीं होती है यह असत्य वचन है?
A. विद्यमान आयु का निषेध करने वाला B. कर्कश C. पैशून्य D. कटुक - अविद्यमान अर्थ का प्रगट करने वाला, असत्य वचन है?
A. देवों की अकाल मृत्यु कहना B. देवों को मारा-मड़ी कहना C. देवों को कुरूप बताना D. उक्त सभी - हास्य नाम का गर्हित असत्य वचन है?
A. भण्ड वचन B. लील वचन C. हास्य वचन D. उक्त सभी - पण्डित सदासुखदासजी ने प्राण जाने पर भी किसे दूषित नहीं करने की प्रेरणा दी है?
A. राग को B. द्वेष को C. वचन को D. पाप को - सुख का सच्चा परिवार नहीं, संस्कारित परिवार है।
- जिस वचन के द्वारा कलह-विवाद-युद्ध होने लगे, महाहिंसा में प्रवृत्ति होने लगे, इस प्रकार के वचन को कहते हैं?
A. गर्हित B. अप्रिय C. सावद्य D. उक्त सभी - जिस वचन को सुनने से हड्डियों की ताकत नष्ट हो जाती है, उस भाषा को कहते हैं?
A. असत्य वचन B. मध्यकूषा C. गर्हित वचन D. उत्तम भाषा - उत्तम सत्यधर्म आत्मा का भाव है?
A. स्वभाव B. विभाव C. अभाव D. उक्त कोई नहीं - श्री रत्नकरण्ड श्रावकाचार जी के अन्तर्गत कितने प्रकार के असत्य की बात कही है?
A. दो B. तीन C. चार D. पाँच - हमें किन स्थानों पर बिना पूछे ही बोलना चाहिए?
A. प्राणियों का उपकार हेतु B. धर्म की रक्षा हेतु C. कषाय स्व-पर का हित हेतु D. उक्त सभी - अपने गुण प्रगट करना, दूसरों के दोष कहना, अपना कुजाति, रूप, बल-विज्ञान आदि का गर्व सहित वचन बोलने को भाषा को कहते हैं?
A. सत्य भाषा B. प्रामाणिक भाषा C. अभिमाननी भाषा D. धर्मभाषा - वह कौन-सा स्थान है जहाँ मौन सहित ही रहना उचित है?
A. अपने बोलने से हिंसा बढ़ती हो B. धर्म की रक्षा हो C. जीवों की रक्षा हो D. कषाय का पोषण हो - असत्य वचन से चार पाप के आस्रव रूप हजारों प्रकार होते हैं उनमें से मुख्य यह है?
A. भगवान् का आज्ञा भंग व परमागम्न से पराङ्मुखता B. घोर पाप का आस्रव D. उक्त सभी - यह जीव उत्तम कुल का है, यह नीच कुल का है इसकी पहचान भी क्या इनके द्वारा होती है?
A. मौखिक के द्वारा B. आभूषणों के द्वारा C. वचनों के द्वारा D. धन-वैभव के द्वारा - जिस वचन से अशुभ वेदना प्रकट हो जाय, ऐसी प्राणी का घात करने वाली भाषा है?
A. अहिंसक B. सत्य C. मृत्यवर्धकरी D. अभयंकरी - सत्यवादी किसके समान होता है?
A. माता के समान विश्वास योग्य B. गुरु के समान पूज्य C. मित्र के समान प्रिय D. उक्त सभी - श्री रत्नकरण्ड श्रावकाचार जी में शुभ के अन्तर्गत अप्रिय भाषा के भेद कहे गये हैं?
A. चार B. पाँच C. आठ D. दस
उत्तम संयम धर्म
-
पाँच व्रतों के एकदेश त्याग करने को कहते हैं?
A. महाव्रत B. अणुव्रत C. उभय D. अमुभय -
मल-मूत्र-कफादि मलों को टस स्थान में फेंकना-त्यागना जहाँ अन्य जीवों का हानि दुःख, बाधा उत्पन्न न हो इसे कहते हैं?
A. अणुव्रत B. महाव्रत C. प्रतिष्ठापन समिति D. पापकार्य -
शरीर तथा उपकरणों को नेत्रों से देख-शोधकर उठाना-धरना उसे कहते हैं?
A. भाषा समिति B. वचनगुप्ति C. आदान निक्षेपण समिति D. ईर्या समिति -
वह क्या है? जिसके अभाव में दीक्षा धारणा, व्रत धारणा मुंड मुंडावना, नग्न रहना, भेष धारणा - ये सभी वृथा है?
A. पी छी B. कमण्डलु C. संयम D. संघ -
संयम बिना हमारे मनुष्य भव की एक घड़ी की व्यतीत होना, ऐसी भावना कि सके होती है?
A. मनुष्य के B. जीव के C. ज्ञानी जीव की D. अज्ञानी जीव की -
संयमी जीव अंतरंग और बहिरंग दोनों ओर से आत्मा की सुरक्षा किस प्रकार करता है?
A. अंतरंग में कषायों से रोककर B. संयम में चला चारित्र अपनाकर
C. उक्त दोनों D. शुभ-अशुभ प्रवृत्ति द्वारा -
एक ऐसी अमूल्य संपत्ति जिसे प्राप्त करके उसे स्वर्ग मोक्ष के समान अन्य दुर्लभ दूसरा नहीं?
A. ख्याति B. प्रयुक्ता C. संयम D. स्वास्थ्य -
विषयों का सुख कैसा है?
A. क्षणभंगुर B. नरकों के घोर दुःखों की प्राप्ति का कारण
C. किम्पाक फल समान D. उक्त सभी -
देख-देखकर इस प्रकार गमन करना कि जिससे जीवों की हिंसा न हो, इस प्रकार की प्रवृत्ति को कहते हैं?
A. अगनाचार B. यतनाचार C. प्रमादचर्या D. संयमचर्या -
विषयों का लोभी होकर जो संयम को विगाड़ता है वह किसके समान है?
A. इंदु के लिए कलश का त्याग B. कौड़ी के लिए चिंतामणि रत्न बेचना C. उक्त दोनों D. धन का लोभी -
मर्यादा/यत्नापूर्वक बने हुए भोजन को भी देख-शोध कर ग्रहण करने को कहते हैं?
A. श्रमणबुद्धि B. शकालुबुद्धि C. एषणासमिति D. दोषबुद्धि -
हित-मित-प्रिय वचन बोलने को कहते हैं?
A. वाक्कारिल B. दीन वचन C. भाषा समिति D. निंद बोला -
पाँच पापों के सम्पूर्ण त्याग को कहते हैं?
A. दिग्व्रत B. देशव्रत C. महाव्रत D. अणुव्रत -
देशव्रत को धारण करने के लिए कौन-से कषाय का क्षयोपशम आवश्यक है?
A. अनन्तानुबंधी का B. अप्रत्याख्यानावरण का
C. उक्त दोनों का D. प्रत्याख्यानावरण का -
नरकगति व तिर्यंचगति में संयम होता है?
A. हाँ B. नहीं C. उक्त दोनों D. शेषांश -
मनुष्यपर्याय में भी ऐसे कौन-से जीव हैं जिन्हें संयम कभी नहीं होता है?
A. अधम देशों में B. इन्द्रियों अन्यभावों में
C. मिथ्यादृष्टि D. उक्त सभी -
अप्रत्याख्यान व प्रत्याख्यान दोनों कषायों के क्षयोपशम से होता है?
A. देश संयम B. असंयम C. सकल संयम D. अविरति -
जो जीव संयम प्राप्त करने के बाद उसे छोड़/विगाड़ देता है, ऐसे जीव को लाभ होता है?
A. संसार पारगमन का B. गृहस्थ आश्रम में भ्रमण का
C. सुगति प्राप्त नहीं होती D. उक्त सभी का -
संयम के दो प्रकार कहे गए हैं?
A. अभय-अभयकाल का B. इन्द्रिय संयम तथा प्राणी संयम
C. सुशील सेवन D. उक्त कोई नहीं -
संयम का आत्मा
इस भव और परभव में एकाग्रता शरणभूत है?
A. पुण्यभाव B. संयमभाव C. माता-पिता
D. स्त्री-पुत्र
उत्तम तप धर्म
-
उत्तम तप किस धर्म कहते हैं?
A. अनशन को B. प्रायश्चित्त को C. इच्छा निरोध को D. एक पैर से खड़े होने को -
इस सोपानक मोह भाव स्वर्ग के तापन से वह समत्व मेल छुड़ाकर हो, हो जाता है, उसी प्रकार आत्मा भी कर्ममल रहित शुद्ध हो जाती है, किसके प्रभाव से?
A. ख्याति B. ऐश्वर्य C. चारित्र धर्म के तप D. प्रभुता -
उत्तम तप धर्म किस वस्तु का स्वभाव भाव है?
A. शरीर का B. आत्मा जीवा C. धर्म का D. आस्रव का -
असानी मिथ्यादृष्टि जीव तप किसे कहते हैं?
A. पंचाग्नि द्वारा शरीर को तपाने B. शरीर को जला देने से C. शरीर कृष करने से D. उक्त सभी -
संसारी जीव के सबसे कठिन कार्य कौन-कौन से हैं?
A. स्त्री-पुत्रादि का रूप B. कुटुम्ब परिवार रूप C. मनमतारूप D. सोसामेटी रूप -
जिस प्रकार स्वर्ण बाह्य पाषाण की संगति से मलिन धूँधसी प्रकार यह आत्मा किस में मलिन हो रहा है?
A. धूल मिट्टी से B. कर्मोदय से C. राग-द्वेष-मोह से D. उक्त सभी -
तप भाव कर्म से नोकर्म के कारण से साखी तप करने की योग्यता किस गति में मिलती है?
A. देव B. नरक C. मनुष्य D. तिर्यंच -
तप करने के योग्य परिणामों का होना कैसा है?
A. सुगम है B. कभी कभी कष्टक है C. अति दुर्लभ है D. सुहापन में कर सकते -
परम धर्म के धारक वि वीतरागी गुरुओं को प्राप्त करके भी तप-संयम ग्रहण की पात्रता के लिए आवश्यक है?
A. सम्यक्त रूप सूर्य का उदय B. अशुभ कर्मों का अति निर्जरा C. संसार-नित्य भोगों से विरक्तता D. उक्त सभी -
तप धारण करके भी यदि कोई विषयों की इच्छा से विगाड़ता है उसको पुनः तप कब प्राप्त होगा?
A. एक वर्ष बाद B. एक माह बाद C. अनन्तानन्त काल तक D. छह माह बाद -
तप करने की अयोग्यता किन-किन गतियों में है?
A. नरक B. तिर्यंच C. देव D. उक्त सभी -
जिनागम में तप कितने प्रकार का कहा है?
A. दस B. आठ C. बारह D. चौदह -
तप करने से क्या होता है?
A. काम B. निद्रा C. प्रमाद D. उक्त सभी -
तप करते समय इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है?
A. परिणामों में उज्ज्वलता बढ़ती चली जाये
B. क्षय की वात-पित्त-कफादि का प्रकोप न हो।
C. तप में उत्साह बढ़े D. उक्त सभी -
श्रुत के अर्थ का प्रकाशन, व्याख्यान करना, स्वयं निरंतर अभ्यास करना, दूसरों को अभ्यास करना को कहते हैं?
A. क्षयोपशम ज्ञान B. बुद्धि कौशल C. तप D. प्रवीणता -
तप धारण करने की शक्ति किसको प्राप्त है?
A. बालक को B. तरुण को C. वृद्ध को D. सभी को -
संसारी जीव ममता रूप जाल में फंसा हुआ क्रोधादि क्रोध, वेदना से तथा स्त्री-पुत्रादि के वियोग से तीव्र आर्तध्यान पूर्वक मरण करके प्राप्त करता है?
A. स्वर्ग सुख B. दुर्गति C. देवों को D. स्त्री-पुत्रादि -
जिससे कर्म के समूह का नाश करके आत्मा स्वाधीन हो जाये उसे कहते हैं?
A. क्षय B. मोक्ष C. तप D. राग -
जिस प्रकार से राग-द्वेष-मोह रूप मैल भिन्न हो जाय तथा शुद्ध ज्ञान-दर्शनमय आत्मा भिन्न हो जाये, उसे कहते हैं?
A. भेद विज्ञान B. प्रज्ञा छैनी C. तप D. उक्त सभी -
कर्मों के बन्धन से जकड़े हुए आत्मा को बन्धन से मुक्त करने का उपाय है?
A. व्रतादि धारण करना B. भेद विज्ञान पूर्वक आत्मा और कर्मों को भिन्न करना
C. पूजा-पाठ करना D. प्रभावना करना
उत्तम त्याग धर्म
- उत्तम त्याग धर्म किसका अंश स्वभाव है?
A. शरीर का B. आत्मा का C. आहार का D. औषध का - यह भी त्याग दान है?
A. श्रद्धान धर्म को कमजोर करना B. मिथ्या वचन बोलना
C. चिड़ियों को दाना देना D. कबूतरों को चुगाना - लोभ रूप अंधकूप में पड़े दरिद्रों में निकालने का उपकार कौन करता है?
A. कृपात्र B. अपात्र C. उत्तम पात्र D. लटेरे - जिनागम में दान कितने प्रकार का कहा है?
A. दो B. तीन C. चार D. छह - ऐसा निर्धन, जिसकी सेवा टहल करने वाला कोई नहीं हो यदि उसे तैयार औषधि मिल जावे तो वह किसके समान मानता है?
A. यह जीव परिग्रह त्याग करने के लिए समय कब होता है?
A. तीव्र राग की तीव्रता में B. राग की मंदता में
C. राग के अनुदय में D. राग के उदय में
A. निधियों के लाभ समान B. स्वर्ग के लाभ समान
C. पुत्र के लाभ समान D. शून्य रूप लाभ समान
प्रश्नोत्तरी
-
दान की सफलता है?
A. भोगने से B. फिजूल खर्ची C. दान से
D. रेस्टोरेन्ट में भोजन करने से -
ऐसे जीव जो समस्त परिग्रह त्यागने को समर्थ नहीं है, वे अपने उपभोग को कहाँ रमाते हैं?
A. सराग धर्म में रुचि रखते हैं B. पाप से भयभीत हैं
C. उत्तम पात्रों को दान देते हैं D. उक्त सभी -
छहकाय के जीवों को अभयदान देने का अर्थ होता है?
A. अभक्ष्य का त्याग B. भला या पूर्वक प्रवृत्ति
C. देह-शोचकर उठाना-धरना D. उक्त सभी -
औषधिदान के प्रभाव से यह जीव देह प्राप्त करता है?
A. नपुंसक शरीर B. हुंडक शरीर C. वैक्रियिक शरीर
D. वामन शरीर -
औषधिदान के द्वारा अनेक गुण प्रकट होकर प्रगट होते हैं?
A. वात्सल्य B. स्थितिकरण (जनहित चिन्तन)
D. उक्त सभी -
ज्ञानदान के प्रभाव से प्राप्त होता है?
A. क्षयोपशम ज्ञान B. मनःपर्ययज्ञान C. अवधिज्ञान
D. केवलज्ञान -
अभयदान के प्रभाव से यह जीव पापी नहीं बनेगा किसका?
A. जन्म-मरण का रोग-शोक का C. दारिद्रय तिर्यगादि संताप का
D. उक्त सभी -
कोई मिथ्यादृष्टि जीव भी यदि पात्र को आहारदान देता है, वह अकाल आगामी भव में कहाँ उत्पन्न होता है?
A. कुभोग भूमि B. भोगभूमि, स्वर्ग C. भवनसमुद्र की स्वयम्भू
D. रमण समुद्र -
भोगभूमि में क्षुधा-तृषा की बाधा कितने दिन के अंतर से होती है?
A. आठ B. पाँच C. छह D. तीन -
आत्मा के उद्धार के लिए अपने को व अन्य को शास्त्र पढ़ाना है?
A. क्षयोपशम ज्ञान B. ज्ञान दान C. जानकारी बढ़ाना
D. प्रवीणता प्रकट करना -
धर्म का स्तम्भ है?
A. पंचकल्याणक B. श्रुति ज्ञान C. बड़े-बड़े मंदिर
D. बड़े-बड़े तीर्थक्षेत्र -
ज्ञान के इच्छुक है?
जहाँ ज्ञानदान होगा वहाँ धर्म रहेगा अतः ज्ञान के इच्छुक जीवों का कर्तव्य है?
A. अपनी संतान को ज्ञान दान करो B. पाठशाला की स्थापना
C. शास्त्र दान करो D. उपर्युक्त सभी -
प्राणी का जीवन, शक्ति, बल, बुद्धि में समीकरण आहार बिना नष्ट हो जाते हैं। जिसने आहारदान दिया प्राणियों को क्या दिया है?
A. जीवन-शक्ति B. बल-बुद्धि C. निरोगता D. सभी कुछ दिया -
श्री रत्नकरण्ड श्रावकाचार जी में के अन्तर्गत क्रियाकार के मन-वचन-काय की प्रवृत्ति का भाग करने को कहते हैं?
A. दूसरों के दुःख को हरण B. सुख में यश और धर्म का कथन
C. जिनसे यश और धर्म नष्ट हो D. क्रोधादि कषायों की निग्रह प्रवृत्ति
D. उक्त सभी -
हमें पात्रदान किस प्रकार देना चाहिए?
A. अभिमान सहित B. विनय स्वेच्छा के धन सहित
C. एहसान दिखाकर D. लोक प्रसिद्धि के लिए
उत्तम आकिंचन्य धर्म
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अपने ज्ञान दर्शनमय स्वभाव के बिना अन्य किंचित् मात्र भी मेरा नहीं है, मैं किसी अन्य द्रव्य का नहीं हूँ - ऐसे अनुभव को कहते हैं?
A. आश्रव B. जीव C. आकिंचन्य धर्म D. बन्ध -
आठ प्रकार का स्पर्श किसका स्वरूप है?
A. जीव B. पुद्गल C. धर्म D. अधर्म -
सुख से परिपूर्ण स्वभाव किसका है, वह हमें कहाँ मिलेगा?
A. शरीर में B. धन दौलत में C. मेरे स्वभाव में
D. इन्टरनेट में -
यह जीव अनादिकाल से कर्मों की संगति में कब से है?
A. कुछ वर्षों से B. ईश्वरों से C. अनादिकाल से
D. अनन्तकाल से -
अनन्तकाल से मैंने व परिश्रम किया है?
A. मिथ्यात्व के उदय से B. स्वरूप ज्ञानरहित होकर
C. परद्रव्यों को अपना स्वरूप जानकर D. उपर्युक्त सभी -
अब ऐसे अवसर में मुझे अपना तथा पर के स्वरूप का ज्ञान हुआ है?
A. अनरणोदि के किंचित् दूर होने से B. श्री गुरुओं के प्रसाद से
C. अपरमागम के प्रसाद से D. उपर्युक्त सभी -
इस जीव ने आकिंचन्य अनादिकाल से आजतक एक ही भावना भाई है कि सकी?
A. आकिंचन्य B. मिथ्यात्व C. सम्यक्त्व की आराधना
D. गैरजान स्वभाव में मिलजुल कर रहे, मोह कषादि मेल को
तथा अपने ज्ञायकत्व भाव को, भिन्न जानकर किस प्रकार?
A. प-चार घण्टे टी.वी. देखने से B. वाच किलो मीटर घूमने से
C. छः शान्त में भ्रमण करने से D. परमागमक निरन्तर अभ्यास से
प्रश्नोत्तरी
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परमार्थ जो शुद्ध आत्मा उसका विचार करने की शक्ति प्रकट होती है किससे?
A. ज्ञानवानके B. बलवानके C. जिनके अधिकपना होता है D. निर्धनके -
यह आत्मा अनादिकाल से कर्मों से मिला हुआ है?
A. मटके में मोतियों के समान B. भण्डारगृह में अनाज के समान
C. क्षीर-नीर के समान D. मोतीचूर के लड्डू समान -
गर्म, ठंडा, नरम, कठोर, लखा, चिकना, हलका, भारी यह सब किसका स्वभाव है?
A. जीव B. पुद्गल C. आस्रव D. संवर -
मेरा स्वभावी सुख से परिपूर्ण है फिर भी मैं दुःखी हो रहा हूँ क्यों?
A. समुचे रिक्शों के मध्यीन होने से C. रात में भावून
B. नहीं मिलने से D. घर के खाने से -
जिसे अकिंचनपना होता है उसके ये अविशय प्रकट होते हैं?
A. परिग्रह में बाह्य का अभाव B. रत्नत्रय में प्रवृत्ति
C. चक्रवर्ती का सुख भी दुःख दिखता है D. उक्त सभी -
जिनका संसार का किनारा आ गया है उनको ही यह धर्म होता है?
A. गृहस्थ धर्म B. श्रावक धर्म C. अकिंचन धर्म
D. पुत्र धर्म -
अकिंचन्य वास्तव में कैसा है?
A. सराग रूप B. परम वीतराग भाव रूप C. शुभभाव रूप
D. अशुभभाव रूप -
अनादिकाल से जितने भी सिंह हर हाथी आगला भी तीर्थंकर आदि सिंह होंगे वे एकमात्र उपसृष्टि होंगे?
A. वस्त्र त्याग से B. भोजन त्याग से C. अकिंचन धर्म से
D. मान ग्रहण से -
अकिंचन्य धर्म का गृहस्थ अवस्था में पालन होता है?
A. सर्व देश B. एक देश C. रंचमात्र भी नहीं
D. उक्त सभी -
अकिंचन्य धर्म का प्रधान रूप से पालन होता है?
A. श्रावक अवस्था में B. गृहस्थ अवस्था में C. साधु अवस्था में
D. वृद्धापन में -
गृहस्थ के अकिंचन्य धर्म बाहर में कैसे दिखाई देता है?
A. आगामी बांधा रहित है B. प्रामाणिक परिग्रह रखता है
C. अल्प परिग्रह में संतोष करता है D. उक्त सभी -
अकिंचन्य धर्म आत्मा का भाव है?
A. अभाव B. विभाव C. स्वभाव D. दुःभाव
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
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समस्त विषयों में अनुराग छोड़कर ब्रह्म जो लोक्य भाव आत्मा उसमें क्या प्रवृत्ति को कहते हैं?
A. अब्रह्मचर्य B. ब्रह्मचर्य C. असंगम D. अनिश्रित -
इस संसार में ब्रह्मचर्य धारण करने में समर्थ कौन है?
A. विषयों का लोलुपी B. जिह्वा का लोलुपी (जो मनुष्यों में)
C. देव के समान है D. तीव्र क्रोधी -
जिसके ब्रह्मचर्य होता है वह जीव सुलभता से जोत बता है?
A. समस्त इन्द्रियों का विषयों का C. भय/उक्त दोनों
B. नहीं D. उक्त कोई नहीं -
स्त्रियों के कुकुंब में रागी जो मन रूपी मदोन्मत्त हाथी है उसे इसके द्वारा रोको?
A. भोग B. वैराग्य भाव का C. परावकारी D. कर्तव्य -
दुर्धर ब्रह्मचर्य को धारण करने के लिए किसको अभाव करना है?
A. स्त्री का B. परिवार का C. विषयों की इच्छा का
D. शरीर का -
यह काम मन का दमन करता है, मन के ज्ञान को नष्ट कर देता है, इसी कारण इसे कहते हैं?
A. पापी B. धर्म आत्मा C. धन्यमय D. पुण्यात्मा -
यह काम भाव कहाँ उत्पन्न होता है?
A. स्त्री में B. पुरुष में C. जीव की चित्त भूमि में
D. तरुणी में -
इसके कारण अनेक जीव, तिर्यंच तथा मनुष्य योनियों में लड़-बड़कर मर जाते हैं, अतः इसे कहते हैं?
स्रोत: Gyata संग्रह।
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