उपशम रस की धारा | Upsham Ras Ki Dhara

रोम रोम में नेमिकुंवर के ‘उपशम’ रस ही धारा क्यों, क्षायिक रस की क्यों नहीं?

भजनों में मुख्यतः जहाँ ‘उपशम रस’ शब्द का प्रयोग होता है, वहाँ उसका अर्थ ‘शांत रस’ , ‘प्रशम भाव’ होता है। इसका संबंध क्षायिक, उपशम अथवा क्षयोपशम भाव वाले ‘उपशम’ के पारिभाषिक अर्थ से नहीं है।