उँ आत्मीयं हुँ
मैं अतिथि हूं
निदेशक - डॉ.बी.बी.सी. जैन
नियमावली
- आपको एक घर दिखाया जाएगा, जिसमें चार सदस्य होंगे।
- उन चार में से तीन उसी घर के मूल निवासी हैं तथा एक अतिथि है।
- आपको उस अतिथि को पहचानना है और साथ में यह भी बताना है कि वो किस घर से है एवं यह घर किसका है।
मैं अतिथि हूं
आदिनाथ
भरत
धर्मनाथ
महावीर
मैं अतिथि हूं
क्रोध
मान
द्वेष
लोभ
मैं अतिथि हूं
सम्मेशिखर
चंपापुर
पावापुर
कुण्डलपुर
मैं अतिथि हूं
त्रसकाय
अग्निकाय
वायुकाय
जलकाय
मैं अतिथि हूं
बहिरात्मा
धर्मात्मा
अंतरात्मा
परमात्मा
मैं अतिथि हूं
अनंतानुबंधी
प्रत्याख्यान
यथाख्यात
संज्वलन
मैं अतिथि हूं
दौलतरामजी
बनारसीदासजी
आशाधरजी
जयसेनजी
मैं अतिथि हूं
अरनाथ
मल्लिनाथ
कुंथुनाथ
शान्तिनाथ
मैं अतिथि हूं
देशना
वांचना
पृच्छना
अनुप्रेक्षा
मैं अतिथि हूं
ज्ञानावरण
दर्शनावरण
वेदनीय
अंतराय
मैं अतिथि हूं
पुष्पमाला
चंवर
दिव्यध्वनि
भामंडल
सूक्ष्मत्व
प्रदेशत्व
अनंतवीर्य
अवगाहनत्व
पद्म
कृष्ण
शुक्ल
हरित
मैं अतिथि हूं
आनन्दी
उद्योगी
विरोधी
संकल्पी
जम्बूस्वामी
गौतमस्वामी
सुधर्मस्वामी
उमास्वामी
8
36
18
25
उत्तरमालिका
- भरत 2. द्वेष
- कुण्डलपुर 4. त्रसकाय
- धर्मात्मा 6. यथाख्यात
- जयसेनजी 8. मल्लिनाथ
- देशना
- वेदनीय 11. पुष्पमाला
- प्रदेशत्व 13. हरित
- आनन्दी 15. उमास्वामी
- 18 17. कायक्लेश
- लब्धिसार
जय जिनेन्द्र
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मूल दस्तावेज़ (PDF): 1911.pdf
स्रोत: Gyata संग्रह।
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