‘कथा सदियों पुरानी’ — जैन पुराण-कथाओं के 15 प्रसिद्ध संवादों पर आधारित प्रश्नोत्तरी: हर संवाद पढ़कर बताइए किसने किससे कहा (दीवान अमरचंदजी, सती सीता, जंबूकुमार, मैनासुंदरी, रानी चेलना, कुंदकुंद आचार्य…)। उत्तरमालिका सहित — दशलक्षण पर्व / पाठशाला के सांस्कृतिक कार्यक्रम व क्विज़ के लिए तैयार सामग्री।
Katha Sadiyon Purani — a ‘who said it to whom?’ Jain katha quiz (15 dialogues with answer key) by Dr. B.C. Jain, Jain Pathshala Jaipur, for Daslakshan / pathshala quiz programs. Full text below; original PDF attached beneath.
निदेशक: डॉ. बी.सी. जैन (जैन पाठशाला जयपुर) · विशेष सहयोग: समकित शास्त्री
नियम: हर स्लाइड पर जैन पुराण-कथाओं का एक प्रसिद्ध संवाद दिया गया है - प्रतिभागी को बताना है किसने किससे कहा?
किसने किससे कहा ?
- हे सिंहराज! खाना हो तो ये जलेबियाँ खाओ और अगर मांस ही खाना है तो मुझे खा लो…
- अरे! निंदा सुनकर मेरी, नाथ त्यागा तुमने मुझको, धर्म की सुनकर निंदा कभी, छोड़ मत देना तुम उसको…
- हे माता! हे पिता! मैं आपकी आज्ञा का उल्लंघन तो नहीं कर सकता, अतः मैं उन चारों कन्याओं से विवाह करने को तैयार हूँ, परन्तु मैं विवाह के अगले दिन ही दीक्षा लूँगा - यह भी निश्चित है…
- पिताजी! कौन किसे आधार जगत में, सब अपने आधार। पर को जो आधार मान ले, वह मूरख सरदार।।
- नहीं, नहीं… भले ही कितना भी धन मिले, चाहे राजकुमार ही क्यों न हो… मैं इस अष्टानिका पर्व में किसी भी जीव को नहीं मारूँगा…
- हे विज्ञपुरुष! मेरे कुछ प्रश्नों के उत्तर तुम बतलाओ - तत्त्व, पदार्थ और अस्तिकाय का अब स्वरूप तुम समझाओ? / तुम रहने दो हे अज्ञ पुरुष, क्या तुमको मैं समझाऊँ; चलो तुम्हारे गुरुवर समीप, मैं उनको सब कुछ बतलाऊँ…
- हे मृगराज! अपने स्वभाव को भूल कर क्यों इस निर्बल पशु के प्राण लेने जा रहे हो…
- दिगम्बर संत उपसर्गों से घबराते नहीं हैं, वे तो अपनी आत्मा में लीन हो जाते हैं; अगर वे सच्चे संत होंगे तो वहीं ध्यान में लीन होंगे…
- हे पुत्री! तुम क्यों दुःखी होती हो, मैं तुम्हारे लिए उनसे भी अच्छा वर ढूँढ कर लाऊँगा…
- वन में पत्थर, वन में कंकड़, वन में सिंह विकराल… बेटा हठ तजो… / माता मोह तजो…
- कैसे मूर्ख दोनों कुमार ये, एक ही कन्या पर रीझ गए। सगी बहन का जान के रिश्ता, मुक्तिमार्ग अनुरागी भए।।
- हे पिताजी! मैंने सात कदम से अधिक बाहर न जाने की प्रतिज्ञा लेकर समाधिमरण ले लिया है। इसलिए आप क्यों इस अजगर को मारकर पंचेंद्रिय जीव की हिंसा का पाप करते हो…
- अरे! तुम लोग यह क्या कर रहे हो? यह कोई चोर नहीं, यह तो धर्मात्मा है। नीलम मणि लाने के लिए मैंने ही इसे कहा था…
- हे महाराज! इस पंचम काल में तीर्थंकर कैसे? भरत क्षेत्र में एक कालखण्ड में 24 तीर्थंकर होने का ही विधान है, जो कि मोक्ष जा चुके हैं। अब 25वें तीर्थंकर कैसे? यह अवश्य किसी कपटी का मायाजाल है…
- अरे! ये इलायची के दाने के बराबर मनुष्य के आकार जैसा प्राणी कौन है और कहाँ से आया है?
उत्तरमालिका
| क्र. | किसने - किससे |
|---|---|
| 1 | दीवान अमरचंदजी - शेर से |
| 2 | सती सीताजी - सेनापति से |
| 3 | जंबूकुमार - माता-पिता से |
| 4 | सती मैनासुंदरी - पिता से |
| 5 | यमपाल चांडाल - राजा से |
| 6 | इन्द्र - इंद्रभूति गौतम |
| 7 | संजय-विजय मुनि - महावीर का जीव |
| 8 | रानी चेलना - राजा श्रेणिक |
| 9 | राजुल के पिता - राजुल से |
| 10 | कुंदकुंद की माता - कुंदकुंद |
| 11 | कुलभूषण - देशभूषण |
| 12 | अनंगसरा - पिता से |
| 13 | जिनभक्त सेठ - सिपाहियों से |
| 14 | रेवती रानी - विद्याधर राजा |
| 15 | सीमंधर समवशरण में अन्य मुनि - सीमंधर भगवान से शंका |
मूल प्रस्तुति: जैन पाठशाला जयपुर
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मूल प्रस्तुति (PDF)
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