प्यारी बात माँ के साथ : खोजो जानो और गाओ · मैं कहाँ से आई हूँ · आगम से आतम की ओर (3 राउंड खेल)

‘प्यारी बात माँ के साथ’ — तीन राउंड का धार्मिक खेल: (1) खोजो जानो और गाओ — उलट-पुलट अक्षरों से शब्द पहचानो और उस शब्द वाली भक्ति गाओ, (2) मैं कहाँ से आई हूँ — पंक्ति पढ़कर बताओ किस जिनवाणी/पूजन से है, (3) आगम से आतम की ओर — जैन ग्रंथों पर पहेलियाँ। दशलक्षण पर्व / पाठशाला के सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए तैयार सामग्री।

Pyari Baat Maa Ke Saath — a 3-round Jain quiz game (word scramble + bhakti singing, ‘identify the Jinvani source’, and riddles on Jain scriptures) for Daslakshan / pathshala cultural programs. Source: 2018 PowerPoint deck (3 files); the complete slide text is below.


राउंड 1 - खोजो, जानो और गाओ

नियम: आपको अक्षर उलट-पुलट कर दिए जाएँगे। उन अक्षरों से आपको शब्द पहचानना है और एक भक्ति गानी है - भक्ति में वह शब्द आना अनिवार्य है। बीच में कुछ चित्र भी दिखाए जाएँगे, उस चित्र को देखकर आपको भक्ति गानी है।

  1. रा णी वी ग त वा
  2. मे ठी प ष् र
  3. पू य म ण् हा
  4. म जि ग ना
  5. ल हि च मा

(हर अक्षर-पहेली के बाद मूल स्लाइड-शो में एक चित्र-स्लाइड है - चित्र देखकर भक्ति गानी है।)

राउंड 2 - मैं कहाँ से आई हूँ

नियम: यहाँ आपको एक पंक्ति दी जाएगी। उस पंक्ति को पढ़कर आपको बताना है कि यह पंक्ति किस जिनवाणी से आई है। यदि पूजन या भक्ति की पंक्तियाँ हैं तो बताना है कि वह किस पूजन या भक्ति की पंक्तियाँ हैं। बालपोथी से लेकर समयसार आदि सभी ग्रंथों के आधार से पंक्तियाँ ली गई हैं। तो बताइए - मैं कहाँ से आई हूँ…

  1. मैं जीव हूँ, मेरे में ज्ञान है, मैं ज्ञान से जानता हूँ।
  2. यह पंच नमस्कार मंत्र सब पापों का नाश करने वाला है।
  3. तीन भुवन में सार, वीतराग विज्ञानता। शिवस्वरूप शिवकार, नमहुँ त्रियोग सम्हारिकैं।।
  4. नमः समयसाराय स्वानुभूत्या चकासते। चित्स्वभावाय भावाय सर्वभावांतरच्छिदे।।
  5. तन का उपचार किया अबतक, उस पर चंदन का लेप किया। मल-मल कर खूब नहाकर के तन के मल का विक्षेप किया।।
  6. जहाँ देह अपनी नहीं, तहाँ न अपनों कोय। घर संपत्ति पर प्रगटये, पर हैं परिजन लोय।।
  7. मिथ्यात्व के कारण परपदार्थ या तो इष्ट या अनिष्ट मालूम पड़ते हैं, मुख्यतया इसी कारण कषाय उत्पन्न होती है।
  8. सकल ज्ञेय ज्ञायक तदपि, निजानंद रसलीन। सो जिनेन्द्र जयवन्त नित, अरिरजरहस विहीन।।
  9. क्षण भर निज रस को पी चेतन मिथ्यामल को धो देता है, काषायिक भाव विनष्ट किए निज आनंद अमृत पीता है।
  10. भूत भविष्यत् वर्तमान की, मैं पूजूँ चौबीसी तीस। विदेह क्षेत्र के सर्व जिनेन्द्रों के, चरणों में धरता शीश।।
  11. संसार पीड़ित जीव को सुगम मोक्षमार्ग के उपदेश का निमित्त बने और वो अभ्यास न करे तो उनके अभाग्य की महिमा हमसे तो नहीं हो सकती।
  12. रोग मरी दुर्भिक्ष न फैले, प्रजा शांति से जिया करै। परम अहिंसा धर्म जगत में फैल सर्व हित किया करै।।

राउंड 3 - आगम से आतम की ओर

(हर पहेली के बाद - “बोलो बोलो क्या…”)

  1. छह अक्षर का मेरा नाम, जड़ से निर्मित होकर भी मेरे अंदर रहता भगवान - बतलाओ तुम मेरा नाम।
  2. सीमंधर के पास गए जो, आतम अनुभव शास्त्र रचे जो, पंचम युग के देव कहाएँ - हम सब उनका नाम बताएँ।
  3. एक अक्षर का मेरा नाम, मैं हूँ पंच प्रभु का धाम, सब जन करते मेरा ध्यान - पूरे जिनागम का है सार।
  4. जिसको तीजा नैन कहा है, सत्य सत्य बतलाती है, द्वादश अंगों से सजी हुई - केवलीकन्या कहलाती है।
  5. चार शतक अरु पंद्रह मोती, हार पिरोया जगमग ज्योति, जड़ से बनी पोटिका भारी - जो है चेतन की उजयारी।
  6. चार अक्षर का मेरा नाम, चार गए चार रहे, सारे जग का ग्राही हूँ - फिर भी निज का रही हूँ।
  7. गागर में सागर लहराता, मोक्ष शास्त्र कहलाता है - कितने सूत्र कहे हैं इसमें, कौनसी भाषा लिखी है इसमें?
  8. पाँच अक्षर का मेरा नाम, मुझको क्या दुनिया से काम, मैं रहता हूँ अपने अंदर - फिर भी दुनिया मेरे अंदर।
  9. चार अक्षर का मेरा नाम, वार रोकने की शक्ति है, प्रथम शब्द संख्या में आता - प्रसिद्ध जैन साहित्य कहलाता।
  10. छः अक्षर का मेरा नाम, सबको मुक्ति मार्ग बताता, कितना सुंदर मेरा काम - बतलाओ तुम मेरा नाम।

(मूल स्लाइड-शो में राउंड 1 और 3 के उत्तर नहीं दिए गए हैं - संचालक अपने स्तर पर उत्तर तय करें।)


मूल प्रस्तुति (PDF)

1 खोजों जानो और गाओ.pdf (849 KB)
2_मैं_कहा_से_आई_हूँ.pdf (53 KB)
3_आगम_से_आतम_की_ओर.pdf (43 KB)