(ज्ञान/आनंद) कैसा संबंध?

क्या ज्ञान और आनंद में अविनाभाव(non separable) संबंध है?
जैसे आग और धुँआ?

ज्ञान आत्मा के एक गुण है, आनंद आत्मा का एक गुण है। दोनों आत्मा के अलग अलग गुण होने से उनमें निश्चय से कोई सम्बन्ध नहीं है। दोनों स्वतंत्र रूप से अपने षटकारक से परिणमन करते है।

ज्ञान-आनंद में अविनाभाव सम्बन्ध इस अपेक्षा से कहा जाता है कि जब ज्ञान (सम्यग्ज्ञान) होता है तब नियम से उसके साथ आनंद होता ही है। इस अपेक्षा से अविनाभाव है। ज्ञान होते ही आनंद की अनुभूति भी हो जाती है।