मोक्षमार्ग के साधन

निश्चय मोक्षमार्ग और vaibhar मोक्षमार्ग मैंने समझने की कोशिश की। परंतु नहीं समझ पाई। कृपया कोई उदहारण से समझाये।

आप मोक्षमार्गप्रकाशक के 7 वे अधिकार को अच्छे से स्वाध्याय कर लेवे आपको पूरा विषय ख्याल में आजायेगा।

आज मैंने पढ़ा। पूरा क्लियर तो अभी भी समझ नहीं आया। शायद धीरे धीरे आ जाये।:blush:

“निश्चय और व्यवहार”
निश्चय को लक्ष्य मानो, व्यवहार पर चलो तुम।
छोडो बुरे करम सब, अच्छे करम करो तुम॥
प्रक्षाल,भजन, पूजन जप आदि है शुभ साधन ।
शुभ साधनों से अपना जीवन निर्मल करो तुम॥1
मार्दव, क्षमा व आर्जव और सत्य, दान, संयम,
इन सारे सदगुणों पर शुभ आचरण करो तुम॥2
सदसाधनों के द्वारा, निश्चय को प्राप्त कर लो ।
पा निश्चय आत्म का, फिर चिंतवन करो तुम॥3
निज परका भेद एक दिन, आ जायेगा समझ में ।
जो पर है उसे छोड़े, निजका वर्णन करो तुम॥4
व्यवहार बिना जग में चलना चेतन कठिन है।
निश्चय न मिले तब तक, व्यवहार पर चलो तुम ॥5

आखरी पंक्ति
विस्तार में समझायें।

व्यवहार के आ.कल्प प.टोडरमलजी ने तीन भेद बताए।

  1. अभेद वस्तु में भेद रूप कथन करना जैसे आत्मा एक अभेद उसके लक्षण जानने के लिए ज्ञानमय,दर्शनमय,चेतनामय,सुख गुण आदि के द्वारा कहना

  2. भेद रूप वस्तु को अभेद रूप कहना।
    जैसे मनुष्य,नारकी,तिर्यंच,ये कुंदकुंदआचार्य,ये अकलंक स्वामी इस तरह शरीर और आत्मा का अभेद रूप कथन करना।

  3. व्रत,शील,संयम ,आठ मूलगुण इनका पालन करना।

ये तीनो व्यवहार शुद्धोपयोग(आत्मा में लीन होना) की पूर्व पर्याय तक चलता रहता है।

जैसे 1)लक्षण जानने के लिए भेद रूप कथन ही करेगा।

  1. लोकव्यवहारमें भेद को अभेद रूप कथन ही करेगा।

  2. यदि वे भोजन करेगा तो नियम से मर्यादा वाला शुद्ध भोजन ही करेगा,रात्रि में पानी नही लेगाआठो मुलगुणो का अवश्य पालन करेगा।

परंतु यह व्यवहार संज्ञा तभी पायेगा जब अभिप्राय(श्र्द्धा) सम्यक होगा,विपरीत अभिप्राय में मिथ्या ही कहलायेगा,

जैसे में शुद्ध भोजन,व्रत आदि को पाल रहा हूँ मूल में यह शरीर की क्रिया है में स्वयं आत्मा हूँ इसमे इन सबका प्रवेश नही, इसको ही अपनी ही मान लेना मिथ्या अभिप्राय है।

सम्यकदृष्टि लोकव्यवहार में भले ही अभेद रूप कथन करे जैसे भाई बहन माता पिता परंतु अभिप्रायसे वे सभी को एक आत्मा रूप ही मानता है इसीके कारण उनको अनंतानुबंधी क्रोद्ध उतपन्न नही होता।

लक्ष्य तो जिनेन्द्र भगवान वत शुद्धोपयोग का ही होगा परंतु विकल्पात्मक अवश्था में व्यवहार चलता रहता है।
इस तरह व्यवहार निश्चय का सुमेल बैठाना

आप 7 वे अधिकार को कम से कम 5-6 पढ़ना तभी भाव पकड़ में आएगा।

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