राग द्वेष की परिभाषा विभिन्न ग्रंथों के आधार पर दीजिए।

कृपया राग और द्वेष की परिभाषाएं विभिन्न ग्रंथों के आधार से प्रेषित करें।

राग किसे कहते हैं ?

उत्तर : किसी पदार्थ को इष्ट जानकर उसमें जीव के प्रीतिरूप परिणाम का होना, वह राग है ।

माया, लोभ, हास्य, रति, तीन वेदरूप परिणाम और परपदार्थों के प्रति आकर्षण, स्नेह, प्रेम, ममत्वबुद्धि, भोक्तृत्वबुद्धि, आसक्ति इत्यादि चारित्रमोहनीय कर्मोदय के समय में अर्थात् निमित्त से होनेवाले जीव के चारित्र गुण के कषायरूप परिणमन अर्थात् परिणामों को राग कहते हैं ।

प्रश्न: द्वेष किसे कहते हैं ?

उत्तर : किसी पदार्थ को अनिष्ट जानकर उसमें जीव के अप्रीतिरूप परिणाम का होना, वह द्वेष है।

क्रोध, मान, अरति, शोक, भय, जुगुप्सा और परपदार्थों के प्रति घृणा, ईर्ष्या, द्वेष, जलन, द्रोह, असूया इत्यादि चारित्रमोहनीय कर्मोदय के समय में अर्थात् निमित्त से होनेवाले जीव के चारित्र परिणमन अर्थात् परिणामों को द्वेष कहते हैं। गुण के कषायरूप परिणमन अर्थात् परिणामों को द्वेष कहते हैं।

गुणस्थान विवेचन : पृष्ठ संख्या ३१