विद्यमान २० तीर्थंकर, ऐसे ही चक्रवर्ती, बलदेव-वासुदेव-प्रतिवासुदेव भी विद्यमान रहते?

जैसे २० तीर्थंकर सदा विद्यमान रहते हैं ऐसे ही चक्रवर्ती, बलदेव-वासुदेव-प्रतिवासुदेव, कामदेव का भी कोई नियम है ?
विद्याधरों को सिद्ध होने वाली विद्याएं क्या देवियां होती हैं ?

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ये उद्धरण ये स्पष्ट करता प्रतीत हो रहा है कि विद्याधरों को विद्याएँ देवीं नही होतीं। :point_down:
धवला 9/4, 1, 16/77/10
एवमेदाओ तिविहाओ विज्जाओ होंति विज्जाहराणं। तेण वेअड्ढणिवासिमणुआ वि विज्जाहरा, सयलविज्जाओ छंडिऊण गहिदसंजमविज्जाहरा वि होंति विज्जाहरा, विज्जाविसयविण्णाणस्स तत्थुवलंभादो। पढिदविज्जाणुपवादा विज्जाहरा, तेसिं पि विज्जाविसयविण्णाणुवलंभादो।
= इस प्रकार से तीन प्रकार की विद्याएँ (जाति, कुल व तप विद्या) विद्याधरों के होती हैं। इससे वैताढय पर्वत पर निवास करने वाले मनुष्य भी विद्याधर होते हैं। सब विद्याओं को छोड़कर संयम को ग्रहण करने वाले भी विद्याधर होते हैं, क्योंकि विद्याविषयक विज्ञान वहाँ पाया जाता है जिन्होंने विद्यानुप्रवाद को पढ़ लिया है वे भी विद्याधर हैं, क्योंकि उनके भी विद्याविषयक विज्ञान पाया जाता है।

जी नही, इनके साथ ऐसा नियम नही है, चक्रवर्ती आदि के होने में अंतराल पड़ता है, एक काल मे 24 तीर्थंकर और 12 चक्रवर्ती, 9 नारायण-प्रतिनारायण-बलभद्र होतें हैं, तो सदा विद्यमानता तो नही ही है।

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