सम्यक-मिथ्यात्व पुण्य प्रकृति


सिद्ध परमेष्टि विधान ( राजमल जी पवैया ), रोला छ्न्द

सम्यक-मिथ्यात्व पुण्य प्रकृति कैसे? या ये मिसप्रिंट है?

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