जीव द्रव्य, तीन काल के समय और मोक्ष सम्बंधित

जीव अनंत है, पुद्गल उससे अनंतगुणा है, तीन काल के समय उससे भी अनंतगुणा है – ऐसा मैंने कई प्रवचनों में सुना है, इसका शास्त्र प्रमाण कहा मिल सकता है?

प्रश्न ये है की हर ६ महीने ८ समय में ६०८ जीव मोक्ष जाते है। यदि ऐसा है तो केवल मोक्ष जाने वाले जीवों की संख्या का माप तीन काल के समय के अनुसार होना चाहिए। लेकिन उपरोक्त माप के अनुसार तो जीव द्रव्य की संख्या तीन काल के समय से अनंतगुणा कम है, तो ये ६ माह, ८ समय का rule कैसे valid है?

वैसे भी कहा है की total जीवों का अनंतवा भाग ही मोक्ष जा सकता है, इस अपेक्षा से तो जीव द्रव्य की कुल संख्या atleast तीन काल के समय के अनंतगुणा होनी चाहिए?

EDIT: Corrected the above sentence based on @Vikas13 Ji’s comment.

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षट्द्रव्यों की संख्या का निर्देश
गोम्मटसार जीवकांड/588/1027जीवा अणंतसंखाणंतगुणा पुग्गला हु तत्तो दु। धम्मतियं एक्केक्कं लोगपदेसप्पमा कालो।588।=द्रव्य प्रमाणकरि जीवद्रव्य अनंत हैं, बहुरि तिनितैं पुद्गल परमाणु अननत हैं, बहुरि धर्मद्रव्य, अधर्मद्रव्य और आकाशद्रव्य एक-एक ही हैं, जातै ये तीनों अखंड द्रव्य हैं। बहुरि जेते लोकाकाश के (असंख्यात) प्रदेश हैं तितने कालाणु हैं। ( तत्त्वार्थसूत्र/5/6 )।


6 महीने 8 समय मे 608 जीव…ऐसा विधान है।

  1. मुक्त जीवों की संख्या
    सर्वार्थसिद्धि/10/9/473/3संख्या जघन्येन एकसमये एकः सिध्यति । उत्कर्षेणाष्टोत्तरशतसंख्याः ।= संख्या की अपेक्षा−जघन्य रूप से एक समय में एक जीव सिद्ध होता है और उत्कृष्ट रूप से एक समय में 108 जीव सिद्ध होते हैं । ( राजवार्तिक/10/9/13/647/25 ) ।

धवला 14/4, 6, 116/143/10सव्वकालमदीदकालस्स सिद्धा असंखेज्जदिभागे चेव, छम्मासमंतरिय णिव्वुइगमणणियमादो ।= सिद्ध जीव सदा अतीत काल के असंख्यातवें भागप्रमाण ही होते हैं, क्योंकि छह महीने के अंतर से मोक्ष जाने का नियम है ।

इसे भी देखें।

I’ll type the question in English too (it is a bit sad that I’m able to type this question better in English than my mother-tongue Hindi).

Total number of ‘Samay’ across past, present, future: K
Total number of ‘Jeev’: J

From what I know K is (inf) * (inf) times more than J (please correct me if I’m wrong). Because

Jeev is (inf). Pudgal is (inf) * (inf) ie infinite times more than Jeev. And K is infinite times the number of Pudgal (again, please correct me if I’m wrong).

If the above is true, then:

Total Samay in past, present, future: K

Every 6 months, 8 Samay, 608 Jeev attain Moksh.

So total Jeev which will attain Moksh: K * 608 / (total samay in 6 months 8 Samay = uncountable)
So total Jeev which will attain Moksh is still in the same order of infinity as K because it is being divided by uncountable (असंख्यात). But that is not true because the total number of Jeev (J) is two (inf) orders of magnitude lesser than K.

How’s that possible?

Other way to look at it is this:

Jeev (J) is two orders of (inf) magnitude less than K. If that is the case, and in every (uncountable) period of time a fixed number of Jeev are attaining Moksh, then J will at some point of time all attain Moksh because

J = (inf)
K = (inf) * (inf) * (inf)

And 608 comes in K / (total number of Samay in 6 months 8 samay = uncountable) which is still (inf) * (inf) * (inf) / (uncountable) = (inf) * (inf) * (inf).

I hope I’m making sense above.

Jai jinendra Rajatji,

Your question is absolutely valid… and my question as well as answer to this is 6 months and 8 samay should not be asankhyat rather anant. Sometimes I think Asankhyat and anant are subjective terms.

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जितना मैंने पढ़ा है, असंख्यात मन:पर्याय या अवधि ज्ञान का विषय बन सकता है, और अनंत सिर्फ़ केवल ज्ञान का विषय बन सकता है।

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इसमें तो कोई दो राय नहीं है, मेरे कहने का मतलब इतना था कि यदि 6 महीना 8 समय को अनंत समय मानें तो जीवों की संख्या से अनंत गुणा 3 काल के समय सिद्ध हो जाएगा।

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NO. It is anshyat. Ansankhyat * sankhyat = ansankhyat.

Asankhyat is of ansankhyat types broadly classified into parit, yukt and ansankyatansankyat each further divided into jaghanya,madhyam and utkrist.

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Yes it is, my mistake.

Is it always true? My understanding was max(Asankhyat) + 1 = Anant ?

So max(asankhyat) * asankhyat can be anant too.