तैजस पुतला और तैजस शरीर

तैजस पुतला के निर्माण में क्या कारण है तथा तैजस शरीर का कार्य क्या है ? कृपया स्पष्ट करे :pray:t2:

तैजस शरीर

=तैजस शरीर नि:सरणात्मक और अनि:सरणात्मक इस तरह दो प्रकार का है। ( राजवार्तिक/2/4/153/15 ) उसमें जो नि:सरणात्मक तैजस शरीर है वह दो प्रकार का है–शुभ और अशुभ।

औदारिक, वैक्रियक और आहारक शरीर में रौनक लाने वाला अनि:सरणात्मक तैजस है।

द्रव्यसंग्रह टीका/10/25/9
संयमनिधानस्य।
=संयम के निधान महामुनि के तैजस समुद्घात होता है। धवला 4/1,3,82/135/6 णवरि पमत्तसंजदस्स उवसमसम्मत्तेण तेजाहारं णत्थि। =प्रमत्त संयत के उपशम सम्यक्त्व के साथ तैजस समुद्घात …नहीं होते हैं।
धवला/7/2,6,1/299/7
तेजइयसमुग्घादो…विणा महव्वएहि तदभावादो।
=बिना महाव्रतों के तैजस समुद्घात नहीं होता। अर्थात नि:सरणात्मक तैजस शरीर मुनिराजो को ही होता है |

  1. आकृति का धारक पुरुष दायें कन्धे से निकलकर दक्षिण प्रदक्षिणा देकर रोग, दुर्भिक्षादि को दूर कर फिर अपने स्थान में आकर प्रवेश करे वह शुभ तैजस समुद्घात है।

  2. क्रोध को प्राप्त हुए संयत के वाम कंधे से बारह योजन लम्बा, नौ योजन चौड़ा और सूच्यंगुल के संख्यातवें भाग प्रमाण मोटा तथा जपाकुसुम के रंगवाला शरीर निकलकर अपने क्षेत्र के भीतर स्थित हुए जीवों का विनाश करके पुन: प्रवेश करते हुए जो उसी संयत को व्याप्त करता है वह अशुभ तैजस शरीर है। ( धवला/4/1,3,2/28/1 )

  3. तैजस समुद्घात का वर्ण शक्ति आदि
    प्रमाण–देखें उपरोक्त लक्षण

विषय अप्रशस्त (अशुभ तैजस) प्रशस्त (शुभ तैजस)
वर्ण जपाकुसुमवत् रक्त हंसवत् धवल
शक्ति भूमि व पर्वत को जलाने में समर्थ रोग मारी आदि के प्रशासन करने में समर्थ
उत्पत्ति स्थान बायां कंधा दायां कन्धा
विसर्पण इच्छित क्षेत्र प्रमाण अथवा 12 यो.×9 यो.=सूच्यंगुल के =संख्यात भाग प्रमाण अप्रशस्तवत्
निमित्त रोष प्राणियों के प्रति अनुकंपा

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शरीर में रौनक/कांति से क्या तात्पर्य है ?

मेरे विचार से यहां रौनक या कांति से तात्पर्य है कि शरीर की चमक, आपने स्वयं ने ही देखा होगा कि मृत शरीर मे और जीवंत शरीर मे कितना अंतर होता है, मृत शरीर मे तेज नही होता, यहाँ उसी से अर्थ ले सकते हैं।

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