निर्जरा सम्बन्धी प्रश्न

छठे गुणस्थान (विकल्प दशा) वाले मुनिराज और पंचम गुणस्थान वाले श्रावक जो स्वानुभूति में लीन है, उस समय दोनो में किन्हे ज़्यादा निर्जरा होगी ?

छटे वालो के। क्योंकि उनके 3 कषाय चौकड़ी का अभाव है।

पंचम गुणस्थानवर्ति श्रावक जो आत्मानुभव में लीन है,उससे ज्यादा निर्जरा विकल्प की अवस्था मे स्थित मुनि को होती है। क्योंकि मुनि के तीन कषाय का अभाव है और निर्जरा का सम्बंध कषायों के अभाव से ही होता है ।

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वास्तव में कोई भी बंध या निर्जरा जीव की कषाय के ऊपर आधारित है।
पंचम गुणस्थान में प्रत्याख्यान और संज्वलन का उदय चलता है।
छठवे गुणस्थान में मात्र संज्वलन कषाय होने से मुनिराज की निर्जरा ज्यादा होगी।
जैसे कोई मिथ्यादृष्टि जीव कितने ही मंद कषाय के परिणाम करता हो और सम्यकदृष्टि युद्ध करे उस समय कई लोगो की हत्या भी हो रही हो,यह तक मुर्दे को 6 महीने तक कंधे पर लेकर घुमता रहे तो भी सम्यक्त्वी की निर्जरा ज्यादा होगी क्योंकि श्रद्धा और चारित्र मोह में विशुद्धि है। ऐसा समजना

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