हम और हमारी पाठशालाएं

हम और हमारी पाठशालाएं

प्रिय साधर्मी
शुद्धात्म वन्दन✨"

आशा है सम्पूर्ण मानव जाति को प्रतिकूल लगने वाले इन २१ दिनों को हम सभी साधर्मीजन धार्मिक अध्ययन, मनन, चिंतन में व्यतीत करके उसे सुखद बना रहे होंगे । सम्पूर्ण विश्व में सुख शांति बनी रहे ऐसी कामना करते है|

जिनशासन की प्रभावना हेतु वर्तमान में संचालित पाठशालाओं को कैसे सुचारू एवं सारगर्भित रूप से चलाया जाये, इस हेतु आपके विचार और सुझाव आपके अनुभव से निबन्धात्मक रूप में आमन्त्रित है |

निम्नलिखित विषयों को अपने निबंध में मुख्य रूप से समाहित करे :
:pencil2: पाठशाला का उद्देश्य
:pencil2: पाठशाला के अध्यापक की विशेषताएं
:pencil2: वर्तमान समय अनुसार, किस पद्धति से बच्चों को पढ़ाया जाए?

पाठशाला से सम्बंधित अन्य विषय/समस्याएं भी इस लेख में समाहित कर सकते है।

नियम :
1. निबंध विद्वत् गण,पाठशाला के अध्यापक, साधर्मीजन सभी लिखकर भेज सकते है ।

2. रचनात्मक-मनोवैज्ञानिक-तर्कसंगत सोच और एवं पढ़ाने की पद्धति के सुझावों को ज्यादा महत्त्व दिया जायेगा ।

3. प्राप्त लेखों में से ३ उत्तम लेख को पुरस्कृत किया जायेगा ।
प्रथम पुरस्कार : ₹ २१००
द्वितीय पुरस्कार : ₹ १५००
तृतीय पुरस्कार : ₹ १०००

4. निबंध हिंदी या अंग्रेजी "या" हिंदी-अंग्रेजी मिश्र भाषा में लिख सकते है । लेखन ५००-६०० शब्दों में होना चाहिए।

5. अपने लेख को टाईप कर या काॅपी में लिख, उसकी PDF बना कर भेजें ।

6. दिनांक १० अप्रेल २०२० तक अपने लेख की PDF वाह्ट्सेप नम्बर # | 9131694446 | या ई-मेल: connect@jinswara.com पर भेजे। अन्य कुछ और जानकारी के लिए | 9131694446 | पर संपर्क करें ।

7. परिणाम ३० अप्रेल, २०२० तक घोषित किये जायेंगे


एक उपक्रम…
स्वरूप स्थिरता फाउंडेशन | जिनस्वरा टीम


Tatva rasik Sadharmi
Jai Jinendra✨

We are at a time when entire human race is put to a test. Hopefully, we all are trying to make these days worthwhile by being engrossed into religious studies, contemplation and meditation. We wish that peace prevails everywhere.

The Pathshalas are one of the strongest mediums of communicating the message of the Jina.

In order to ensure optimum productivity and efficiency, we invite short essays which would focus on how to judiciously run these pathshalas in the current scenario.

The topics for the short essay may include the following:

:pencil2: Purpose of Pathshalas
:pencil2: Features of Pathshala teacher
:pencil2: According to the present time, by which method should children be taught?

Other topics / problems related to Pathshalas can also be included in this short essay.

"Rules:
1. Scholars, teachers and other members of the pathshala and Jain community are encouraged to participate.

2. Creativity and psychological , rational thinking and ideas relating teaching techniques will be given more importance.

3. Out of all the articles, 3 best articles will be rewarded -
First Prize: ₹ 2100
Second Prize: ₹ 1500
Third Prize: ₹ 1000

4. Essays can be written in Hindi or English or both exceeding not more than 500–600 words.

5. Type your article or you may send a scanned copy of the handwritten text in PDF format.

6. The article must be received by 10th April, 2020 via WhatsApp +91-9131694446 Or e-mail: connect@jinswara.com. For any other queries, contact +91-9131694446.

7. Results will be declared by April 30, 2020


An Initiative Under:
Swaroop Sthirta Foundation | Jinswara

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